इस्लामाबाद, पाकिस्तान: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की बहन अलीमा खान की हिरासत का मामला अब संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच गया है। मानवाधिकार वकील माइकल पोलाक ने संयुक्त राष्ट्र के मनमाने हिरासत संबंधी कार्य समूह (UN Working Group on Arbitrary Detention) और अन्य विशेष प्रक्रियाओं के समक्ष उनकी हिरासत को लेकर एक “तत्काल शिकायत” दाखिल करने की जानकारी दी है।

पोलाक ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने अलीमा खान के परिवार और करीबी लोगों के निर्देश पर यह शिकायत दाखिल की है। उनके मुताबिक, शिकायत में अभिव्यक्ति, आस्था और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल के कारण अलीमा की हिरासत को कथित तौर पर मनमाना और गैरकानूनी बताया गया है। हालांकि, ये आरोप वकील और अलीमा के समर्थकों की ओर से किए गए हैं।

30 दिन के लिए हिरासत में हैं अलीमा खान

अलीमा खान को 20 सितंबर को लाहौर में हिरासत में लिया गया था। लाहौर के डिप्टी कमिश्नर मुहम्मद अली इजाज ने पंजाब में लागू Maintenance of Public Order (MPO) Ordinance, 1960 के तहत उनकी 30 दिन की हिरासत का आदेश जारी किया। बाद में पुलिस ने उनकी मौजूदगी कोट लखपत जेल में होने की पुष्टि की। हिरासत आदेश में सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, आदेश में अलीमा खान के साथ मुहम्मद आमिर की हिरासत का भी निर्देश दिया गया था।

27 सितंबर के PTI मार्च से पहले कार्रवाई

अलीमा खान की हिरासत ऐसे समय हुई है जब PTI ने 27 सितंबर को इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर विरोध मार्च की घोषणा की है। PTI का कहना है कि मार्च राजनीतिक और शांतिपूर्ण होगा, जबकि पाकिस्तानी प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई हैं। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, सरकार ने PTI के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ाई है। अलीमा खान की हिरासत को लेकर PTI नेताओं और उनके परिवार ने उनकी रिहाई की मांग की है।

वकील माइकल पोलाक ने क्या कहा?

माइकल पोलाक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को भेजी गई शिकायत में यह तर्क दिया गया है कि अलीमा खान को उनके भाई इमरान खान के समर्थन और पाकिस्तान में लोकतंत्र के पक्ष में उनकी सार्वजनिक गतिविधियों के कारण निशाना बनाया गया। पोलाक ने यह भी दावा किया कि हिरासत का उद्देश्य 27 सितंबर को प्रस्तावित PTI विरोध प्रदर्शन के समर्थन को कमजोर करना हो सकता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, प्रशासन के आदेश में हिरासत का आधार सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को बताया गया है।

UN के सामने किस तरह की शिकायत?

पोलाक के अनुसार, शिकायत संयुक्त राष्ट्र के Working Group on Arbitrary Detention के अलावा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा जैसे अधिकारों से जुड़े UN Special Rapporteurs को भी भेजी गई है। UN Working Group on Arbitrary Detention संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रियाओं के तहत काम करता है और मनमाने तरीके से स्वतंत्रता से वंचित किए जाने के कथित मामलों की जांच करता है।

परिवार के अन्य सदस्यों को हिरासत में लेने का दावा

मामला अलीमा खान तक सीमित नहीं रहने का दावा भी सामने आया है। इमरान खान के बेटे कासिम खान ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि उनकी मौसियों डॉ. उजमा और नूरीन तथा कुछ अन्य रिश्तेदारों को भी अधिकारियों ने हिरासत में लिया। कासिम ने दावा किया कि कुछ लोगों को उनके घरों से वाहनों में ले जाया गया और उनके ठिकाने की जानकारी तत्काल नहीं दी गई। बाद में उन्होंने कुछ बच्चों के सुरक्षित होने की जानकारी भी दी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हुई है।

PTI ने हिरासत की निंदा की

PTI अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान सहित पार्टी नेताओं ने अलीमा खान की हिरासत की आलोचना की और उनकी रिहाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि 27 सितंबर का प्रस्तावित मार्च शांतिपूर्ण और राजनीतिक गतिविधि है। वहीं, प्रशासन का पक्ष यह है कि अलीमा खान की हिरासत सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े आधार पर की गई है। इस तरह, उनकी हिरासत को लेकर सरकार और PTI के दावों में स्पष्ट अंतर है। फिलहाल, अलीमा खान को 30 दिन की हिरासत में कोट लखपत जेल में रखा गया है और उनके मामले ने पाकिस्तान में राजनीतिक विरोध, निवारक हिरासत की शक्तियों और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है।