पंजाब की राजनीति में ‘वारिस पंजाब दे’ (WPD) की गतिविधियां आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक नए चरण में दिखाई दे रही हैं। संगठन से जुड़े हालिया बयानों और नई राजनीतिक एंट्री में नशे, भ्रष्टाचार, रोजगार, कानून-व्यवस्था और संविधान के दायरे में राजनीति जैसे मुद्दों पर जोर दिखाई दे रहा है। पूर्व प्रवर्तन निदेशालय (ED) डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह और पूर्व पंजाब पुलिस DSP बलविंदर सिंह सेखों का संगठन से जुड़ना भी इसी बदलाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
वहीं, अकाली दल से जुड़े रहे विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के WPD में आने के बाद पार्टी के राजनीतिक विस्तार को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। अयाली ने कहा है कि संगठन सभी समुदायों के लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में काम करेगा और हिंदू तथा मुस्लिम दोनों समुदायों से उम्मीदवार उतारने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में आने की स्थिति में एक हिंदू और एक दलित उपमुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव हो सकता है। ये फिलहाल अयाली द्वारा व्यक्त राजनीतिक विचार हैं, किसी लागू सरकारी व्यवस्था का हिस्सा नहीं।
निरंजन सिंह की एंट्री से क्या संकेत?
पूर्व ED अधिकारी निरंजन सिंह ने 23 सितंबर को WPD में शामिल होने के बाद कहा कि पंजाब में नशे, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर वह संगठन के साथ आए हैं। उनके मुताबिक, वह खुद को पारंपरिक अर्थों में राजनीतिक व्यक्ति नहीं मानते और उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला नहीं किया है।
निरंजन सिंह का नाम पंजाब के चर्चित ड्रग मामलों की जांच से जुड़ा रहा है। उन्होंने ED में रहते हुए जगदीश भोला ड्रग रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच की थी और इस दौरान वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ भी की थी। वह 2021 में सेवानिवृत्त हुए।
WPD में शामिल होने के बाद निरंजन सिंह ने देश की एकता और संप्रभुता को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि संविधान सर्वोच्च होना चाहिए और कानून तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के मामले का फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठन के प्रमुख और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़े राजनीतिक विमर्श में पहले अलगाववादी नारों और खालिस्तान से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। निरंजन सिंह ने इन सवालों के जवाब में देश की संप्रभुता से समझौता न करने की बात कही है।
अयाली की एंट्री और SAD से दूरी
मनप्रीत सिंह अयाली लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल (SAD) से जुड़े रहे हैं। उनके WPD में शामिल होने के बाद संगठन में पारंपरिक अकाली राजनीति से जुड़े चेहरे की मौजूदगी बढ़ी है। अयाली का कहना है कि उन्होंने WPD में शामिल होते समय यह स्पष्ट किया था कि संगठन को संविधान के दायरे में रहकर काम करना चाहिए।
अयाली ने SAD के कमजोर होने के कारणों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी समय के साथ एक परिवार-केंद्रित संगठन में बदल गई और इससे युवाओं का उससे जुड़ाव कम हुआ। उन्होंने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को लेकर 2015 में लिए गए अकाली नेतृत्व के फैसले को भी पार्टी के राजनीतिक पतन से जोड़कर देखा। ये अयाली के राजनीतिक आकलन हैं, जिन्हें पार्टी के अन्य नेताओं और समर्थकों की राय से अलग समझना जरूरी है।
हिंदू-मुस्लिम उम्मीदवारों पर क्या बोले अयाली?
WPD की राजनीतिक पहुंच को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा अयाली के उस बयान से हुई है जिसमें उन्होंने कहा कि संगठन हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों से उम्मीदवार उतारेगा।
अयाली ने ‘सरबत दा भला’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन के मन में किसी समुदाय के प्रति भेदभाव नहीं है। उन्होंने सत्ता में आने की स्थिति में एक हिंदू और एक दलित उपमुख्यमंत्री बनाने की बात भी कही।
इस बयान को संगठन की राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इसका चुनावी असर कितना होगा। आगामी चुनाव में उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय समीकरण और मतदाताओं की प्रतिक्रिया इस रणनीति के व्यावहारिक प्रभाव को तय करेंगे।
ड्रग्स बना रहा है मुख्य राजनीतिक मुद्दा
WPD के हालिया बयानों में ड्रग्स का मुद्दा लगातार प्रमुखता से सामने आया है। निरंजन सिंह ने भी नशे के खिलाफ कार्रवाई को संगठन से जुड़ने की प्रमुख वजहों में बताया है। पूर्व DSP बलविंदर सिंह सेखों ने भी पार्टी में शामिल होने के बाद नशे के खिलाफ काम करने की बात कही।
पार्टी की ओर से पंजाब में ड्रग्स को लेकर एक White Paper लाने की बात भी कही गई है। इसका उद्देश्य नशे की समस्या, उससे जुड़े नेटवर्क और सरकारों की भूमिका पर राजनीतिक दस्तावेज पेश करना बताया गया है।
निरंजन सिंह ने इसके साथ भ्रष्टाचार, रोजगार और कानून-व्यवस्था को भी अपने चार प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव लड़ने के बजाय इन मुद्दों पर राजनीतिक भूमिका निभाना चाहते हैं।
क्या WPD सभी समुदायों तक पहुंच बढ़ा रही है?
हालिया घटनाक्रम से इतना जरूर दिखाई देता है कि संगठन के साथ जुड़ने वाले कुछ नए चेहरे अलग-अलग पेशेवर और राजनीतिक पृष्ठभूमि से हैं। पूर्व ED अधिकारी, पूर्व पुलिस अधिकारी और लंबे समय तक SAD से जुड़े रहे विधायक की मौजूदगी संगठन के सार्वजनिक राजनीतिक संदेश में बदलाव की चर्चा को बढ़ाती है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक प्रमोद कुमार ने इस बदलाव को लेकर अलग राय रखी है। उन्होंने संगठन के गैर-पंथिक चेहरों को शामिल करने को उसकी राजनीतिक पहचान में बदलाव की कोशिश बताया और इसकी सफलता पर सवाल उठाए। यह उनका विश्लेषण है, न कि किसी चुनावी नतीजे का स्थापित तथ्य।
आने वाले समय में WPD का विजन डॉक्यूमेंट, उम्मीदवारों की सूची, समुदायों के बीच प्रतिनिधित्व और ड्रग्स-केंद्रित एजेंडा यह स्पष्ट करेंगे कि संगठन अपने राजनीतिक विस्तार को किस तरह आगे बढ़ाता है। फिलहाल पंजाब की राजनीति में WPD की गतिविधियां 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में सामने आई हैं।
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