Gaza Documentary NAZA: गाजा युद्ध पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘NAZA’ को वेनिस फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल जूरी प्राइज मिलने के बाद इजरायल में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। फिल्म को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ी आपत्ति जताई है, जबकि संस्कृति मंत्री मिकी जोहर ने इसके निर्देशक युवल अब्राहम और राहेल जोर की इजरायली नागरिकता रद्द करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है।
फिल्म में गाजा में इजरायली सैन्य अभियानों और आम नागरिकों की मौतों से जुड़े गंभीर दावों को सामने रखा गया है। दूसरी तरफ इजरायली सरकार और सेना ने फिल्म में किए गए आरोपों को खारिज किया है। इस पूरे विवाद ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, युद्धकालीन पत्रकारिता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच टकराव को लेकर बहस तेज कर दी है।
वेनिस में मिला Special Jury Prize
‘NAZA’ को 83वें वेनिस फिल्म फेस्टिवल में Special Jury Prize से सम्मानित किया गया। फिल्म का निर्देशन इजरायली पत्रकार युवल अब्राहम और फिल्ममेकर राहेल जोर ने किया है। वेनिस फिल्म फेस्टिवल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह 80 मिनट की फिल्म है और इसे The Guardian तथा JW Films ने प्रोड्यूस किया है।
फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान इसे दर्शकों की करीब 25 मिनट की स्टैंडिंग ओवेशन मिली। इसके बाद इसे जूरी पुरस्कार मिलना विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और चर्चा में ले आया।
फिल्मकारों के मुताबिक, डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य गाजा में सैन्य अभियानों के पीछे मौजूद कथित व्यवस्थाओं और फैसलों की पड़ताल करना है।
‘NAZA’ में आखिर दिखाया क्या गया है?
फिल्म का आधार इजरायली सैन्य और खुफिया तंत्र से जुड़े लोगों के इंटरव्यू हैं। फिल्म में इंटरव्यू देने वाले कुछ लोगों की पहचान गुप्त रखी गई है। डॉक्यूमेंट्री में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि गाजा में लक्ष्यों का चयन किस तरह किया जाता था और सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों की संभावित मौतों को किस तरह आकलन में शामिल किया जाता था।
वेनिस की आधिकारिक सिनॉप्सिस फिल्म को इजरायली सैन्य अभियानों में फिलिस्तीनी नागरिकों की मौतों से जुड़ी व्यवस्था की पड़ताल के रूप में प्रस्तुत करती है। हालांकि, ये फिल्मकारों और डॉक्यूमेंट्री में शामिल स्रोतों के दावे हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
नेतन्याहू ने क्यों जताई नाराजगी?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फिल्म को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे चौंकाने वाला बताया और आरोप लगाया कि यह दुनिया में यहूदियों के खिलाफ नफरत बढ़ाने वाले माहौल में योगदान देती है।
नेतन्याहू की आपत्ति का मुख्य आधार यह है कि उनके अनुसार फिल्म इजरायल और उसकी सेना के खिलाफ एकतरफा और भ्रामक तस्वीर पेश करती है। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि ऐसे आरोप देश की छवि और सैनिकों को नुकसान पहुंचाते हैं।
इजरायली सेना ने भी फिल्म में लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि डॉक्यूमेंट्री में दिए गए गुमनाम बयानों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है और फिल्म वास्तविकता को विकृत करती है।
फिल्मकारों की नागरिकता पर क्यों उठी बात?
विवाद तब और गंभीर हो गया जब इजरायल के संस्कृति मंत्री मिकी जोहर ने दोनों फिल्मकारों की नागरिकता रद्द करने की दिशा में कार्रवाई करने की बात कही।
जोहर ने फिल्म और उसके निर्माताओं पर इजरायल के खिलाफ काम करने तथा युद्ध के दौरान दुश्मन की मदद करने जैसी संभावनाओं की जांच की मांग की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से यह पता लगाने को कहा कि फिल्म के लिए सामग्री कैसे हासिल की गई, इसके पीछे कौन लोग थे और क्या सामग्री हासिल करने या प्रकाशित करने के दौरान कोई ऐसा कृत्य हुआ जिसे कानून के तहत गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है।
उन्होंने फिल्म को इजरायल के खिलाफ और देश के प्रति विश्वासघात के रूप में भी पेश किया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, जोहर ने नागरिकता रद्द करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाने की बात कही है।
हालांकि, नागरिकता रद्द करने की मांग और वास्तविक रूप से नागरिकता समाप्त होना दो अलग बातें हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में अभी इसे सरकारी कार्रवाई की मांग/प्रक्रिया के रूप में बताया गया है, अंतिम नागरिकता समाप्ति के रूप में नहीं।
युवल अब्राहम ने क्या कहा?
पुरस्कार स्वीकार करते हुए युवल अब्राहम ने कहा कि इजरायल के लोगों के लिए इस फिल्म को देखना जरूरी है। उनका तर्क था कि अपराध से इनकार करने की स्थिति में अपराध जारी रहने का खतरा बना रहता है।
अब्राहम ने फिल्म को सिर्फ एक सिनेमाई प्रोजेक्ट के बजाय जवाबदेही और युद्ध के दौरान होने वाली घटनाओं की जांच के माध्यम के रूप में पेश किया।
उनके इस रुख से यह स्पष्ट है कि फिल्मकार इजरायल के भीतर भी गाजा युद्ध पर सार्वजनिक बहस को बढ़ाना चाहते हैं।

गाजा में मौतों का आंकड़ा भी विवाद के केंद्र में
गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, युद्ध में 73,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या नागरिकों की बताई जाती है। दूसरी तरफ इजरायल का कहना है कि वह सैन्य अभियानों में नागरिकों को नुकसान से बचाने की कोशिश करता है और हमास पर नागरिक इलाकों का सैन्य इस्तेमाल करने का आरोप लगाता है।
यही विरोधाभासी दावे गाजा युद्ध की अंतरराष्ट्रीय बहस का सबसे संवेदनशील हिस्सा हैं। ‘NAZA’ इसी विवाद को इजरायली सैन्य और खुफिया अधिकारियों के कथित अनुभवों के जरिए सामने रखने की कोशिश करती है।
फिल्म ने बढ़ाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस
‘NAZA’ विवाद अब सिर्फ एक डॉक्यूमेंट्री को लेकर राजनीतिक असहमति तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ इजरायली सरकार का तर्क है कि युद्ध के दौरान सेना और देश के खिलाफ गंभीर आरोप लगाने वाली सामग्री से राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की छवि प्रभावित हो सकती है।
दूसरी तरफ फिल्मकार और उनके समर्थक इसे पत्रकारिता और कलात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा मानते हैं। उनका कहना है कि युद्ध के दौरान सत्ता और सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा है।
वेनिस फिल्म फेस्टिवल का पुरस्कार इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले आया है। अब मामला इस बात पर भी निर्भर करेगा कि इजरायल के अधिकारी फिल्म के खिलाफ किस तरह की कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाते हैं और क्या नागरिकता से जुड़ी मांग वास्तव में किसी औपचारिक कानूनी प्रक्रिया में बदलती है।
फिलहाल ‘NAZA’ को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान और उसके बाद इजरायल सरकार की प्रतिक्रिया ने गाजा युद्ध पर चल रही राजनीतिक, कानूनी और मानवीय बहस को एक नया आयाम दे दिया है।
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