SBI रिपोर्ट: पेट्रोल-डीजल महंगा होने से वित्तीय स्थिति पर सीधा असर नहीं

By  Preeti Kamal May 18th 2026 12:01 PM

नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को बढ़ते नुकसान से राहत देने के लिए की गई है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट ‘इकोरैप’ के अनुसार, इस बढ़ोतरी से उपभोक्ता महंगाई दर पर अल्पकालिक असर जरूर पड़ेगा, लेकिन देश की वित्तीय स्थिति पर इसका “सीधा प्रभाव नहीं” पड़ेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद शुरुआत में खपत में थोड़ी गिरावट आती है, लेकिन बाद में मांग फिर सामान्य हो जाती है।

कीमतों में बढ़ोतरी के बाद खपत में गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक, “ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के तुरंत बाद खपत में गिरावट देखी जाती है, लेकिन बाद में यह फिर से सामान्य हो जाती है और सालाना खपत पर कोई बड़ा असर नहीं दिखता।

मई-जून 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई पर इसका तत्काल प्रभाव 15-20 बेसिस पॉइंट तक हो सकता है। इसी आधार पर FY27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत किया गया है। हालांकि, इसका वित्तीय स्थिति पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।”

रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है

रिपोर्ट में कहा गया कि लंबे समय तक खुदरा कीमतें स्थिर रहने के कारण तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, “केंद्रीय मंत्री के मुताबिक OMCs को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, जो सालाना लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपये बैठता है।”

3 रुपये प्रति लीटर की मौजूदा बढ़ोतरी से कंपनियों के अंडर-रिकवरी में लगभग 52,700 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी, जो वित्त वर्ष 2027 में अनुमानित कुल नुकसान का करीब 15 प्रतिशत है। SBI रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यदि सरकार पेट्रोल और डीजल पर वर्तमान उत्पाद शुल्क (Excise Duty) को शून्य कर दे, तो सरकार के राजस्व और OMCs की कमाई में करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये की कमी आ सकती है।

राजकोषीय घाटा GDP के 0.5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है

रिपोर्ट के अनुसार, “यदि सरकार खर्च में कटौती नहीं करती है, तो इससे राजकोषीय घाटा GDP के 0.5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। रिपोर्ट में बताया गया कि मार्च में 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी कटौती समेत मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार को कुल 3 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।

फिलहाल 3 रुपये की खुदरा मूल्य वृद्धि से OMCs के कुल नुकसान का 15 प्रतिशत हिस्सा कवर हो रहा है, जबकि एक्साइज ड्यूटी को शून्य करने पर लगभग 53 प्रतिशत नुकसान की भरपाई हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यदि केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी खत्म करती है, तो इसका असर राज्यों की आय पर भी पड़ेगा।

एक्साइज ड्यूटी शून्य होने से लाखों रुपये का होगा नुकसान

रिपोर्ट के अनुसार, “हमारे अनुमान के मुताबिक यदि केंद्र की एक्साइज ड्यूटी शून्य की जाती है, तो राज्यों को करीब 0.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा। हालांकि, बढ़ती तेल कीमतों से राज्यों को करीब 30,000 करोड़ रुपये का फायदा भी होगा। इस तरह राज्यों के राजस्व पर कुल शुद्ध असर करीब 50,000 करोड़ रुपये का पड़ेगा।”

© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.