पश्चिम बंगाल में अवैध कॉल सेंटर मामले में ED की 10 जगहों पर छापेमारी...
पश्चिम बंगाल: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में कथित अवैध कॉल सेंटर संचालन से जुड़े मामले में 10 स्थानों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एजेंसी के अधिकारियों ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामले से जुड़े आरोपियों के बारे में मिली सूचनाओं के आधार पर एक साथ कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया।
सोमवार सुबह से जारी इन छापेमारियों में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी, हावड़ा, बिधाननगर और दुर्गापुर समेत कई शहरों में कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और कॉल सेंटर नेटवर्क से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों की जांच के तहत की जा रही है।
कई लोगों के ठिकानों की तलाशी
अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों के ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है, उनमें सुराश्री कर, सम्राट घोष और सुभाजीत चक्रवर्ती समेत कई अन्य लोग शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन सभी के कथित तौर पर इस अवैध कॉल सेंटर ऑपरेशन से जुड़े होने की आशंका है। अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य कथित अवैध गतिविधियों से जुड़े सबूत जुटाना और वित्तीय लेन-देन का पता लगाना है। जांच के दौरान दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य सामग्री की भी जांच की जा सकती है।
‘लैंड-फॉर-जॉब’ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED का दावा
एक अलग घटनाक्रम में, प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली की एक अदालत को बताया कि आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपियों, जिनमें उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं, के खिलाफ लैंड-फॉर-जॉब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। ईडी ने राउस एवेन्यू कोर्ट में अपनी दलीलें पूरी करते हुए कहा कि आरोपियों ने कथित अपराध से अर्जित धन का उपयोग किया और उससे लाभ उठाया।
अदालत में अगली सुनवाई मार्च के अंत में
ईडी की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले को 23 मार्च से 30 मार्च के बीच आरोपियों की ओर से दलीलें सुनने के लिए सूचीबद्ध किया है। इससे पहले अदालत ने 16 आरोपियों को समन जारी किए थे, जिनमें लालू प्रसाद यादव, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और व्यवसायी अमित कात्याल शामिल हैं। अमित कात्याल को पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का करीबी सहयोगी बताया जाता है।