TMC सांसद काकोली घोष ने छोड़े संगठनात्मक पद, शुभेंदु की बैठक के बाद बढ़ी हलचल

By  Laxman May 27th 2026 04:17 PM

Kakoli Ghosh Dastidar इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चा, बोलीं- ‘पार्टी नहीं छोड़ रही, आम कार्यकर्ता के तौर पर रहूंगी साथ’। Kakoli Ghosh Dastidar के इस्तीफे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब पार्टी के भीतर असंतोष और अंदरूनी तनाव की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं।

हालांकि काकोली घोष ने साफ किया कि वह All India Trinamool Congress (TMC) नहीं छोड़ रही हैं और पश्चिम बंगाल के लोगों के हित में एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में पार्टी से जुड़ी रहेंगी।

इस्तीफे के पीछे ‘मानसिक संघर्ष’ का जिक्र

राज्य तृणमूल अध्यक्ष Subrata Bakshi को लिखे अपने पत्र में काकोली घोष ने कहा कि लंबे समय से चल रहे मानसिक संघर्ष और आत्ममंथन के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है।

उन्होंने पत्र में पार्टी के भीतर कामकाज के तरीके और हाल के वर्षों में सामने आए विवादों पर भी चिंता जताई।

काकोली ने भर्ती घोटाला, प्रशासनिक अनियमितताओं, जेल से जुड़े विवादों और शिक्षक भर्ती मामले जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने उन्हें नैतिक रूप से प्रभावित किया है।

शुभेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल होने से बढ़ी चर्चा

काकोली घोष का इस्तीफा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले वह कल्याणी में आयोजित एक प्रशासनिक बैठक में शामिल हुई थीं, जिसकी अध्यक्षता Suvendu Adhikari ने की थी।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अनौपचारिक रूप से इस बैठक में शामिल न होने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

बैठक के बाद शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि काकोली घोष ने उनसे कहा था कि उन्हें “अब आजादी महसूस हो रही है।”

RG Kar मामले का भी किया जिक्र

अपने इस्तीफे में काकोली घोष ने R. G. Kar Medical College and Hospital से जुड़े चर्चित मामले का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि ट्रेनी डॉक्टर की मौत और उससे जुड़े घटनाक्रम ने समाज को गहराई से झकझोर दिया। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को दबाने की कोशिशों ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी परेशान किया।

I-PAC की भूमिका पर सवाल

काकोली घोष ने राजनीतिक रणनीतिकार संस्था Indian Political Action Committee (I-PAC) के बढ़ते प्रभाव पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि पार्टी के संगठनात्मक फैसलों में “गैर-निर्वाचित ताकतों” का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जो लोकतांत्रिक ढांचे के लिए ठीक नहीं माना जा सकता।

नंदीग्राम उपचुनाव में भी बढ़ी मुश्किलें

इसी बीच नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर भी TMC की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

Pabitra Kar ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। इसके बाद पार्टी ने पुराने नेता शेख सुफियान से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने भी चुनाव लड़ने में रुचि नहीं दिखाई।

शेख सुफियान ने साफ कहा कि अब वह सक्रिय राजनीति से दूरी बनाना चाहते हैं।

ममता बनर्जी पर FIR

राज्य की राजनीति में तनाव के बीच Mamata Banerjee के खिलाफ सिलीगुड़ी में FIR दर्ज होने की खबर ने भी सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

उन पर चुनाव प्रचार के दौरान कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने और धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप लगाए गए हैं।

TMC के लिए बढ़ सकती है चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के भीतर असंतोष धीरे-धीरे खुलकर सामने आने लगा है।

वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी, संगठनात्मक फैसलों पर सवाल और उपचुनाव में उम्मीदवारों की तलाश जैसी परिस्थितियां पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकती हैं।

क्या आगे और बढ़ेगा संकट?

काकोली घोष ने पार्टी छोड़ने से इनकार जरूर किया है, लेकिन उनका इस्तीफा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि TMC नेतृत्व इस असंतोष को कैसे संभालता है और आने वाले समय में पार्टी के भीतर क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।

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