हॉर्मुज़ नाकाबंदी पर चीन से ब्रिटेन तक विरोध, अमेरिका के फैसले पर वैश्विक नाराज़गी...
हॉर्मुज़ नाकाबंदी का विरोध: अमरीका ने इस्लामाबाद में ईरान के साथ शांति वार्ता विफल होने के बाद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नाकाबंदी शुरू कर दी है। इस अभियान की निगरानी कर रहे यूएस सेंट्रल कमांड ने सोमवार रात पुष्टि की कि नाकाबंदी 1400 GMT से लागू हो गई है। यह नाकाबंदी ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी जहाजों पर लागू होगी, जिनमें अरब सागर और ओमान की खाड़ी के जहाज भी शामिल हैं।
हालांकि, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले की दुनिया के कई बड़े देशों ने आलोचना की है, जिनमें चीन भी शामिल है। वहीं, NATO देशों ने इस नाकाबंदी में अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया है। यह कदम क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है, क्योंकि ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपना नियंत्रण होने का दावा करता है।
अमरीकी हॉर्मुज़ नाकाबंदी का विरोध करने वाले देश
हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने वाले जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। इस कदम के जरिए अमेरिका ईरान की आय के स्रोत को कम करना चाहता है, जो वह जहाजों से टोल वसूलकर प्राप्त करता था। अमेरिकी हॉर्मुज़ नाकाबंदी का विरोध करने वाले देशों में कई बड़े देश शामिल हैं।
चीन
चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नाकाबंदी न लगाए। उन्होंने कहा, “हमारे ईरान के साथ व्यापार और ऊर्जा समझौते हैं, हम उम्मीद करते हैं कि कोई हमारे मामलों में हस्तक्षेप न करे।” उन्होंने यह भी कहा कि यह जलमार्ग चीन के लिए खुला है।
ब्रिटेन (UK)
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि उनका देश इस नाकाबंदी में शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा, “हम इस नाकाबंदी का समर्थन नहीं कर रहे हैं। व्यापार के लिए इस जलमार्ग का खुला रहना जरूरी है।”
फ्रांस
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सीधे तौर पर विरोध नहीं किया, लेकिन “शांतिपूर्ण बहुराष्ट्रीय” और “सख्त रक्षात्मक” मिशन की वकालत की। उन्होंने कहा कि यूके के साथ मिलकर ऐसे देशों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जो इस जलमार्ग में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करना चाहते हैं।
जर्मनी
जर्मनी ने भी संकेत दिया है कि वह इस नाकाबंदी में हिस्सा नहीं लेगा। जर्मनी पहले ही ईरान युद्ध में किसी भी सैन्य भागीदारी से इनकार कर चुका है।
सऊदी अरब
सऊदी अरब अमेरिका पर दबाव बना रहा है कि वह हॉर्मुज़ नाकाबंदी खत्म करे और बातचीत का रास्ता अपनाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने अपने तेल निर्यात को बनाए रखने के लिए कच्चे तेल को रेगिस्तान के रास्ते रेड सी तक पाइपलाइन से भेजना शुरू कर दिया है।
वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20% हॉर्मुज़ से गुजरता है
गौरतलब है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता था। यह जलमार्ग 28 फरवरी से ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद IRGC द्वारा अवरुद्ध किया गया था, जब अमेरिका और इज़राइल ने तेहरान पर बमबारी की थी। हालांकि, 7 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम के बाद ईरान ने इसे फिर से खोलने पर सहमति जताई थी।