वेनेजुएला भूकंप: 6 दिन बाद मलबे से जिंदा निकला 3 साल का मासूम
भीषण भूकंप में हजारों लोगों की मौत के बीच उम्मीद की किरण बनी यह घटना। जॉर्डन की रेस्क्यू टीम ने 144 घंटे बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालकर नई जिंदगी दी।
वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के छह दिन बाद एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया को भावुक कर दिया। राजधानी काराकस में मलबे के नीचे दबे तीन साल के एक मासूम बच्चे को जीवित बचा लिया गया। बचाव अभियान के दौरान सामने आए वीडियो में रेस्क्यू टीम की खुशी और बच्चे के सुरक्षित बाहर आने का दृश्य लोगों के लिए उम्मीद की नई मिसाल बन गया है।
पिछले सप्ताह वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचाई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक करीब 2,000 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।
144 घंटे बाद मिली नई जिंदगी
मंगलवार, 30 जून को जॉर्डन की एक विशेष रेस्क्यू टीम ने राजधानी काराकस के एक ढही हुई इमारत के मलबे से तीन साल के बच्चे को जीवित बाहर निकाला। करीब 144 घंटे तक मलबे में फंसे रहने के बावजूद बच्चे का जीवित मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।
बचाव अभियान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में रेस्क्यू कर्मी बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद खुशी जाहिर करते दिखाई देते हैं। इसके बाद मौके पर मौजूद मेडिकल टीम ने बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया और तुरंत अस्पताल भेज दिया।
अस्पताल में चल रहा इलाज
एक अन्य वीडियो में रेस्क्यू टीम के सदस्य बच्चे का चेहरा साफ करते, उसे कंबल ओढ़ाते और एम्बुलेंस तक ले जाते दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों की निगरानी में बच्चे का इलाज जारी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने इस घटना को पूरे देश के लिए उम्मीद और हौसले का प्रतीक बताया। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में जुटी सभी टीमों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे पल कठिन समय में लोगों का मनोबल बढ़ाने का काम करते हैं।
क्यों खास है यह रेस्क्यू?
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बड़े भूकंप के बाद शुरुआती 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसी अवधि में मलबे में फंसे लोगों के जीवित मिलने की संभावना सबसे अधिक रहती है। समय बीतने के साथ भोजन, पानी और ऑक्सीजन की कमी के कारण जीवित बचने की संभावना लगातार कम होती जाती है।
ऐसे में छह दिन बाद किसी बच्चे का सुरक्षित मिलना बचाव अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि राहत कार्य तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक उम्मीद पूरी तरह समाप्त न हो जाए।
भूकंप से भारी तबाही
बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंपों ने वेनेजुएला के कई शहरों को बुरी तरह प्रभावित किया। राजधानी काराकस और उसके आसपास के क्षेत्रों में अनेक इमारतें धराशायी हो गईं। विशेष रूप से ला गुएरा क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ, जहां कई रिहायशी भवन पूरी तरह मलबे में बदल गए।
वेनेजुएला की संसद के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज के अनुसार, अब तक 6,461 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। हालांकि राहत एजेंसियों का मानना है कि कई लोग अब भी मलबे में फंसे हो सकते हैं, इसलिए खोज और बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा।
इस त्रासदी के बीच तीन वर्षीय बच्चे का जीवित बचना पूरे देश के लिए आशा की एक नई किरण बनकर सामने आया है। यह घटना याद दिलाती है कि सबसे कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद जिंदा रहती है।