नई दिल्ली: अमरीका, इज़रायल और लेबनान ने शुक्रवार को एक त्रिपक्षीय रूपरेखा (Framework Agreement) समझौते पर हस्ताक्षर किए। वॉशिंगटन में चार दिनों तक चली वार्ता के बाद हुए इस समझौते को भविष्य में स्थायी शांति समझौते की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।समझौते की घोषणा करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह इज़रायल और लेबनान के बीच स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा, "हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि लेबनान की संप्रभु सरकार और इज़रायल सरकार ने अमरीका की मध्यस्थता और समर्थन से एक रूपरेखा समझौते पर सहमति जताई है।" मार्को रुबियो ने इसे "शुरुआत की शुरुआत" बताते हुए कहा कि अभी कई कठिन बातचीत बाकी है।

समझौते में सहयोग की भूमिका में अमरीका 

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, "हम इस प्रक्रिया की चुनौतियों को कम करके नहीं आंकते, लेकिन हमें पता है कि यह कितना महत्वपूर्ण है और हम इस समझौते में सहयोग कर सम्मानित महसूस कर रहे हैं।" अमरीका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मुआवद ने इस समझौते को लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की बहाली की दिशा में पहला कदम बताया।

नेतन्याहू ने किया सेना की वापसी का ऐलान

समझौते पर हस्ताक्षर होने के कुछ ही समय बाद इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की कि इज़रायल रक्षा बल (IDF) दक्षिणी लेबनान के दो इलाकों से अपनी सेना हटाएगा। इनमें एक क्षेत्र लितानी नदी के उत्तर में और दूसरा उसके दक्षिण में स्थित है। पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने कहा कि सेना उन क्षेत्रों से हटेगी जहां उसकी अब आवश्यकता नहीं है।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक हिज़्बुल्लाह पूरी तरह से निरस्त्र नहीं हो जाता, तब तक इज़रायल दक्षिणी लेबनान के अन्य रणनीतिक क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा। नेतन्याहू ने इस समझौते को इज़रायल की बड़ी रणनीतिक जीत बताते हुए कहा कि इससे ईरान को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा, "ईरान हमें दक्षिणी लेबनान से बलपूर्वक हटाना चाहता है। लेकिन इज़रायल, लेबनान और अमेरिका मिलकर उसे स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि यह उसका मामला नहीं है।"

समझौते में क्या है खास?

रिपोर्ट के मुताबिक, इस रूपरेखा समझौते के तहत दो पायलट परियोजनाएं लागू की जाएंगी।

  • इज़रायली सेना दक्षिणी लेबनान के दो सीमित इलाकों से पीछे हटेगी।
  • इसके बाद लेबनानी सेना वहां तैनात होगी।
  • अमेरिकी सैन्य अधिकारी पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे ताकि हिज़्बुल्लाह के लड़ाके दोबारा उन इलाकों में प्रवेश न कर सकें।
  • दोनों पायलट क्षेत्र लितानी नदी के दोनों ओर स्थित हैं।

इज़रायली अधिकारियों के अनुसार यह कदम सीमित जरूर है, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि विस्तारित सैन्य अभियान के दौरान कब्जे वाले क्षेत्रों से यह पहली वापसी होगी।

समझौते के बावजूद जारी है संघर्ष

कूटनीतिक प्रगति के बावजूद जमीनी स्तर पर संघर्ष जारी है। इज़रायली सेना ने दावा किया कि शुक्रवार को उसने कब्जे वाले क्षेत्र के पास सक्रिय हिज़्बुल्लाह के सात लड़ाकों को मार गिराया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यह ताजा संघर्ष 2 मार्च को तब शुरू हुआ था जब ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह ने इज़रायल पर हमले किए थे। इसके कुछ दिन पहले अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की थी। इसके जवाब में इज़रायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई और जमीनी अभियान शुरू किया।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:

  • लेबनान में 4,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
  • 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।
  • इज़रायल की ओर 32 सैनिक और 4 नागरिक मारे गए हैं।
  • हिज़्बुल्लाह ने आधिकारिक हताहत आंकड़े जारी नहीं किए हैं, लेकिन मई में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार संगठन के हजारों लड़ाके मारे जा चुके हैं।

अमेरिका-ईरान वार्ता भी जारी

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच समानांतर कूटनीतिक वार्ता भी जारी है। दोनों देशों ने व्यापक संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से एक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। फिलहाल 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया चल रही है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और होरमुज़ जलडमरूमध्य की समुद्री सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है।