अयोध्या, उत्तर प्रदेश: अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान की कथित हेराफेरी के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद संत समाज की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बावजूद कई संत जांच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त एवं त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
आध्यात्मिक वक्ता करपात्री महाराज ने एसआईटी की जांच पर असंतोष जताते हुए कहा, "मैं एसआईटी की जांच से संतुष्ट नहीं हूं। मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह करता हूं कि इस मामले में कठोर कार्रवाई की जाए। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त मुकदमे दर्ज हों और उन्हें अयोध्या छोड़ने के लिए कहा जाए।"
8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज, जांच जारी
वहीं, साकेत भवन पीठाधीश्वर सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट के बाद आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और आगे की जांच जारी है। उन्होंने सरकार से इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए नजीर बने।
सुग्रीव किला के पुजारी रामभवन पांडेय ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया गया था। जांच पूरी होने के बाद आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अन्य आरोपियों की भी जल्द गिरफ्तारी होगी।
"Not satisfied with SIT investigation": Ayodhya priests demand strict action following FIR in alleged Ram Mandir donations embezzlement caseRead @ANI Story| https://t.co/Zfod7ZFk2m #AyodhyaPriests #RamMandir #Donationrow #SIT pic.twitter.com/L5tgTUOblD
— ANI Digital (@ani_digital) June 26, 2026
जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी हो कानूनी कार्रवाई
हनुमानगढ़ी के पुजारी रामेशदास महाराज ने कहा कि रिपोर्ट सामने आने के बाद भी कुछ लोग अनावश्यक बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिसने भी अपराध किया है, उसे कानून और न्यायालय के माध्यम से सख्त सजा मिलनी चाहिए।
इस बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने दावा किया कि कांग्रेस के दबाव के चलते इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा, गोपाल राव, चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया कि दान राशि के कथित गबन के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
14 जून को राज्य सरकार ने 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत यह एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव सहित अन्य लोगों को नामजद किया गया है। यह कार्रवाई अयोध्या से पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक पवन पांडेय द्वारा लगाए गए उन आरोपों के बाद हुई, जिनमें दावा किया गया था कि श्रीराम मंदिर में प्राप्त लगभग 7 से 7.5 करोड़ रुपये के दान का कथित रूप से गबन किया गया।
आरोपों के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर 14 जून को राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। उधर, इस मामले में एक नई याचिका भी सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई है। याचिका में कथित वित्तीय अनियमितताओं, दान राशि के गायब होने और ट्रस्ट के प्रशासन से जुड़े मामलों की अदालत की निगरानी में जांच कराने तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित करने की मांग की गई है।
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