मॉस्को, रूस: रूस ने अमरीका और ईरान के बीच प्रस्तावित अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया में सहयोग देने की बात कही है। रूस के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही वाशिंगटन और तेहरान के बीच अंतिम समझौता औपचारिक रूप ले लेगा, मॉस्को सुरक्षा परिषद में संबंधित प्रस्ताव पर रचनात्मक ढंग से भागीदारी करेगा।
रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने गुरुवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तीसरे अनुच्छेद में अंतिम समझौता तैयार करने का प्रावधान है। इसके लिए दोनों देशों को 60 दिनों का समय दिया गया है, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया भी जा सकता है।
17 जून को दोनों देशों ने वर्चुअल माध्यम से किए थे हस्ताक्षर
प्रवक्ता ने बताया कि एमओयू के 14वें अनुच्छेद में इस अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से अनुमोदित करने का प्रावधान है, जो संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों पर बाध्यकारी होगा। उन्होंने कहा, "अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौते का प्रावधान एमओयू के तीसरे अनुच्छेद में किया गया है। 17 जून को दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने इसे वर्चुअल माध्यम से हस्ताक्षरित किया था। समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिन निर्धारित किए गए हैं और आवश्यकता पड़ने पर इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है।"
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— ANI Digital (@ani_digital) June 26, 2026
अमरीका-ईरान के समझौते के बाद रूस चर्चा के लिए सहमत
मारिया ज़खारोवा ने आगे कहा, "जब अमेरिका और ईरान अंतिम समझौते को औपचारिक रूप दे देंगे, तब रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में संबंधित मसौदा प्रस्ताव पर सबसे रचनात्मक तरीके से चर्चा और सहमति बनाने की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए तैयार रहेगा।" यह बयान ऐसे समय आया है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन के तहत तकनीकी वार्ताओं का पहला चरण पूरा हुआ है। दोनों देशों ने एक उच्च स्तरीय समिति (हाई-लेवल कमेटी) गठित करने और 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है।
इस समझौते का उद्देश्य पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और शत्रुता को समाप्त करना तथा क्षेत्र में स्थिरता और शांति स्थापित करना है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर अंतिम समझौता हो जाता है, तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
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