लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रारंभिक बाल शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। इसी क्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिक विद्यालयों से जोड़ने (को-लोकेशन) और उनकी वैज्ञानिक मैपिंग का व्यापक अभियान शुरू किया गया है।
यह पहल भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के संयुक्त दिशा-निर्देशों के तहत संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य छोटे बच्चों को विद्यालयी शिक्षा के लिए बेहतर ढंग से तैयार करना, शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वित लाभ उपलब्ध कराना तथा आंगनबाड़ी से प्राथमिक विद्यालय तक बच्चों का सहज और व्यवस्थित संक्रमण सुनिश्चित करना है।
इस संबंध में महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी तथा बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की निदेशक हर्षिता माथुर ने संयुक्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी जिलों में अभियान को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। मैपिंग, यू-डायस डेटा अपडेट और संबंधित पोर्टलों पर सूचना अपलोड करने की प्रक्रिया का संयुक्त सत्यापन जिला कार्यक्रम अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जाएगा, ताकि आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता बनी रहे।
बुनियादी शिक्षा को मिलेगी नई मजबूती:
सरकार का मानना है कि यह अभियान बालवाटिका, निपुण भारत मिशन और बुनियादी शिक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से बच्चों की स्कूल रेडीनेस में सुधार होगा। साथ ही शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के एकीकृत क्रियान्वयन से सीखने की गुणवत्ता और बच्चों के समग्र विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
30 जून तक पूरा होगा अभियान:
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि 30 जून तक प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों तथा कक्षा-1 संचालित परिषदीय विद्यालयों की मैपिंग पूरी कर ली जाए। इस दौरान संबंधित विद्यालयों का यू-डायस कोड दर्ज करते हुए यू-डायस और हॉट कुक्ड मील पोर्टल पर आवश्यक सूचनाएं भी अपडेट की जाएंगी। इससे दोनों विभागों के रिकॉर्ड में समानता आएगी और योजनाओं के संचालन में बेहतर तालमेल स्थापित होगा।
तय मानकों के अनुसार होगी मैपिंग:
विद्यालय परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को को-लोकेटेड केंद्र के रूप में चिन्हित किया जाएगा। जो केंद्र विद्यालय परिसर के बाहर स्थित हैं, उन्हें निर्धारित दूरी के आधार पर निकटतम प्राथमिक विद्यालय से जोड़ा जाएगा। 200 मीटर के दायरे में स्थित केंद्रों की मैपिंग उसी विद्यालय से होगी, जिससे बच्चों को हॉट कुक्ड मील समय पर उपलब्ध कराया जा सके। जहां विद्यालय परिसर में पर्याप्त स्थान नहीं होगा, वहां निकटतम उपयुक्त विद्यालय को जोड़ा जाएगा। शहरी क्षेत्रों में 500 मीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में एक किलोमीटर की परिधि के भीतर स्थित विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी।
संयुक्त निगरानी से सुनिश्चित होगी पारदर्शिता:
पूरे अभियान की निगरानी जिला कार्यक्रम अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संयुक्त रूप से करेंगे। मैपिंग, यू-डायस अपडेट और पोर्टल पर अपलोड किए गए आंकड़ों का सत्यापन भी दोनों विभाग मिलकर करेंगे, जिससे अभियान पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
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