गुवाहाटी, असम: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा गुरुवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा से जुड़े पासपोर्ट विवाद मामले में पूछताछ के लिए गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन पहुंचे। पुलिस स्टेशन के बाहर मीडिया से बातचीत में पवन खेड़ा ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “जांच जारी है और मैं इसमें सहयोग कर रहा हूं।”

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अप्रैल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास भारत, यूएई और मिस्र के तीन पासपोर्ट हैं। साथ ही उन्होंने दुबई में आलीशान संपत्तियां और अमरीका के वायोमिंग में एक कंपनी होने का भी दावा किया था।

सरमा परिवार ने इन आरोपों को किया खारिज

सरमा परिवार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दस्तावेजों को AI से तैयार फर्जी कागजात” बताया, जिन्हें पाकिस्तानी सोशल मीडिया समूहों द्वारा फैलाया गया। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले कहा था, "आरोप लगाने से पहले उन्हें विदेश मंत्री से पूछ लेना चाहिए था। खड़गे जी उम्रदराज हो गए हैं, फिर भी पागलों जैसी बातें करते हैं।"

इसके आगे उन्होंने कहा, "असम पुलिस ‘पाताल’ से भी लोगों को ढूंढकर ला सकती है। मुझे शक है कि राहुल गांधी ने उन्हें ये दस्तावेज दिए हैं। इसलिए यह मामला राहुल गांधी तक भी जाएगा। हमें डराने की कोशिश मत कीजिए। यह असम है और हमने 17 बार इस्लामी आक्रमण का मुकाबला किया है।"

पवन खेड़ा छापेमारी के बाद हैदराबाद चले गए थे

मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया था कि पवन खेड़ा छापेमारी के बाद हैदराबाद चले गए थे। उन्होंने कहा, “मीडिया के जरिए मुझे पता चला कि पुलिस दिल्ली स्थित उनके आवास पर गई थी, लेकिन वह हैदराबाद भाग गए। कानून अपना काम करेगा।” इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित झूठे बयान देने के मामले में पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दी थी। मामला कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए रिनिकी भुइयां सरमा को बदनाम करने के आरोपों से जुड़ा है।

 प्रथम दृष्टया यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से प्रेरित

न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस चांदूरकर की पीठ ने कहा था कि प्रथम दृष्टया यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से प्रेरित लगता है और इस स्तर पर हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है। अदालत ने कहा कि आरोपों की सत्यता की जांच ट्रायल के दौरान की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि गिरफ्तारी की स्थिति में पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए, बशर्ते वह जांच में पूरा सहयोग करें और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों के सामने पेश हों। अदालत ने उन्हें गवाहों को प्रभावित करने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने से भी रोका।

अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने पर किया SC का रूख

अदालत ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों की कुछ टिप्पणियां, जिनमें मुख्यमंत्री के बयान भी शामिल हैं, इस विवाद के राजनीतिक स्वरूप को दर्शाती हैं। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल जमानत याचिका तक सीमित हैं और मामले के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगी। पवन खेड़ा ने गौहाटी हाईकोर्ट द्वारा 24 अप्रैल को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। मामले की जांच अभी जारी है और आगे की सुनवाई में आरोपों की वैधता पर फैसला होगा।