नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने आरजेडी प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव मामले की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कथित “जमीन के बदले नौकरी” मामले में दर्ज सीबीआई एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि यह याचिका “मेरिटलेस” यानी बिना आधार के है। जस्टिस रविंदर दुदेजा की बेंच ने यह फैसला सुनाया।
याचिका में 2022 में दर्ज एफआईआर के साथ-साथ 2022, 2023 और 2024 में दाखिल तीन चार्जशीट और संज्ञान लेने के आदेशों को भी चुनौती दी गई थी। यादव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि कथित घटनाएं उस समय की हैं जब वह रेल मंत्री थे, इसलिए यह उनके आधिकारिक कार्यक्षेत्र में आती हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत जांच शुरू करने से पहले पूर्व अनुमति जरूरी थी।
Delhi High Court refused to quash the CBI case against RJD chief Lalu Prasad Yadav in the ‘land-for-jobs’ scam. The court rejected his plea that the CBI lacked the required sanction to prosecute, observing that the petition had no merit pic.twitter.com/ngfCnQhMPU
— IANS (@ians_india) March 24, 2026
ये मामला ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों से जुड़ा है
वहीं, सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि ऐसी किसी अनुमति की जरूरत नहीं थी। उन्होंने बताया कि नियुक्तियों से जुड़े फैसले जनरल मैनेजर स्तर पर लिए जाते हैं, न कि सीधे मंत्री द्वारा, इसलिए धारा 17A लागू नहीं होती। यह मामला 2004 से 2009 के बीच भारतीय रेलवे के वेस्ट सेंट्रल जोन (जबलपुर, मध्य प्रदेश) में ग्रुप-डी पदों पर कथित अनियमित नियुक्तियों से जुड़ा है। सीबीआई के अनुसार, इन नौकरियों के बदले जमीन के टुकड़े यादव के परिवार या सहयोगियों के नाम ट्रांसफर किए गए।
कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया- लालू यादव
सीबीआई ने 18 मई 2022 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें लालू प्रसाद यादव के साथ उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया। यादव ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि कथित घटनाओं के करीब 14 साल बाद एफआईआर दर्ज की गई, जबकि पहले की जांच बंद कर दी गई थी।
लालू यादव ने इसे कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। हालांकि, अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है और मामले की जांच व कार्यवाही जारी रहेगी।