नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और CJP (Cockroach Janata Party) ने अपने रुख में बदलाव किया है। अब प्रदर्शनकारियों की ओर से सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर जोर नहीं दिया जा रहा है। इसके बजाय सरकार और संबंधित जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग को प्रमुखता दी जा रही है।

दरअसल, शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। CJP भी इस आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन कर रहा है। शुरुआती दौर में प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल था। हालांकि, अब आंदोलन की मांगों में बदलाव दिखाई दे रहा है।

इस्तीफे की जगह जवाबदेही पर जोर

रिपोर्ट के मुताबिक, सोनम वांगचुक की मौजूदा शर्तों में अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल नहीं है। उनका जोर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जिम्मेदारी तय करने और इन मामलों को संसद में उठाए जाने पर है। वांगचुक ने आंदोलन समाप्त करने के लिए सरकार की ओर से जिम्मेदारी स्वीकार करने या राजनीतिक नेताओं द्वारा संसद में मुद्दों को उठाने जैसी शर्तें रखी हैं।

लंबे समय से जारी है विरोध प्रदर्शन

सोनम वांगचुक और CJP का यह आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर शुरू हुआ था। वांगचुक ने 28 जून 2026 से CJP के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था। शुरुआती मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रमुख रूप से शामिल था। लंबे समय तक अनशन के कारण वांगचुक की सेहत को लेकर भी चिंता जताई गई। उनके समर्थकों और कई राजनीतिक नेताओं ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। इस बीच आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है।

वहीं, CJP ने भी अपने रुख में नरमी दिखाई है। संगठन की ओर से अब केवल किसी एक मंत्री के इस्तीफे पर जोर देने के बजाय शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, सुधार और जवाबदेही की मांग को आगे रखा जा रहा है।

आंदोलन की रणनीति में बदलाव के संकेत

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे हटना आंदोलन की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब आंदोलन का फोकस किसी व्यक्ति के इस्तीफे के बजाय शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित होता दिखाई दे रहा है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार से जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की मांग अभी भी जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच संवाद की दिशा क्या रहती है।