पीठ ने इस मामले को फिल्म 'घूसखोर पंडत' से जुड़े अपने पहले के फैसले से अलग बताया। अदालत ने कहा कि “घूसखोर” शब्द का अर्थ भ्रष्ट होता है, जो किसी समुदाय के साथ स्पष्ट रूप से नकारात्मक विशेषता जोड़ता है। इसके विपरीत, 'यादव जी की लव स्टोरी' शीर्षक में कोई भी प्रतिकूल विशेषता या स्टीरियोटाइप नहीं जोड़ा गया है। अदालत ने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत लगाए जाने वाले किसी भी युक्तिसंगत प्रतिबंध का इस मामले में लागू होना नहीं पाया गया।