GTC Bharat: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने वैश्विक राजनैतिक परिदृश्य को हिला कर रख दिया है। अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में उनके हताहत होने की खबर ने न केवल मध्य-पूर्व में तनाव को बढ़ाया है बल्कि दुनिया भर में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का एक तूफ़ान भी खड़ा कर दिया है।
कई देशों के नेताओं ने शांति और संघर्ष के बीच अपनी अपनी आवाज़ उठाई है। वहीं, भारत में भी इसका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। भारत में भी कई राजनीतिक दलों ने खामेनेई की मौत पर अपना-अपना मत दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि मध्य-पूर्व में हुए इस हमले से जो तनावपूर्ण हालात बने हैं उसका असर भारतीय राजनीति पर भी सीधे तौर पर पड़ा है।
US President Donald J. Trump posts, "Khamenei, one of the most evil people in History, is dead. This is not only Justice for the people of Iran, but for all Great Americans, and those people from many Countries throughout the World, that have been killed or mutilated by Khamenei… pic.twitter.com/JkUKxkKmQP
— ANI (@ANI) February 28, 2026
सोशल मीडिया एक्स पर राजनीतिक हल्कों से कई ऐसी प्रतिक्रियाएं निकलकर सामने आई हैं, जिनमें अमेरिका और इज़रायल के इस संयुक्त हमले की निंदा तो की ही गई है, साथ ही वहाँ फसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। आइये जानते हैं कि आज दिन भर में इस तनावपूर्ण विषय को किस नेता ने किस नज़र से देखा...
भारतीय नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने एक्स पर स्पष्ट शब्दों में इस हत्याकांड की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे एक संप्रभु राष्ट्र के शीर्ष नेता की “लक्षित हत्या” बताया और कहा कि इससे व्यापक संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने विश्व को शांति की आवश्यकता पर भी जोर दिया और भारत के नेतृत्व से यह कहा कि वह भारत के नागरिकों की सुरक्षा और लौटने को प्राथमिकता दे।
The targetted assassination of the leadership of a sovereign nation by the so called leaders of the democratic world and the killing of multitudes of innocent people is despicable and deserves strong condemnation, no matter what the proclaimed reason for it is.It is tragic that…
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) March 1, 2026
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने युद्ध के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई और भारत के मध्य-पूर्व में फंसे नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया।
The rapidly escalating hostilities between US-Israel and Iran are deeply concerning.The safety and security of every Indian citizen across the Middle East must be our highest priority.I urge the Government of India to take immediate and proactive measures to safeguard our…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 28, 2026
खामेनेई की मौत पर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह का भी रिएक्शन आया। उन्होंने खामेनेई को विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए एक्स पर लिखा कि ख़ामेनेई का जाना एक युग का अंत है। भारत ने अपना एक सच्चा दोस्त खो दिया है। ईरान भारत का परम्परागत मित्र है, उसने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ हमेशा हमारा साथ दिया, कश्मीर के मुद्दे पर भारत के पक्ष वोट किया, ऊर्जा क्षेत्र में भारत को सुरक्षा प्रदान की, सस्ता तेल उपलब्ध कराया। आज ईरान संकट में है भारत को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
ख़ामेनेई का जाना एक युग का अंत है।भारत ने अपना एक सच्चा दोस्त खो दिया है।खामेनेई जी को विनम्र श्रद्धांजलि।ईरान भारत का परम्परागत मित्र है, उसने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ हमेशा हमारा साथ दिया,कश्मीर के मुद्दे पर भारत के पक्ष वोट किया, ऊर्जा क्षेत्र में भारत को सुरक्षा प्रदान की,… pic.twitter.com/HBGDbBKvNg
— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) March 1, 2026
वहीं, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X पर लिखा कि अयातुल्ला अली खामेनेई न केवल ईरान के सर्वोच्च नेता थे, बल्कि शिया मुस्लिम समुदाय के प्रमुखों में से एक थे। उनकी मृत्यु के बाद आने वाले समय में क्या परिणाम होंगे, यह एक अवांछित तमाशा होगा जिसकी कल्पना करना कठिन है।
Ayatollah Ali Khamenei was not just Iran’s supreme leader but also one of the head of Shia Muslim community, how his death plays out in time to come will be an unwanted spectacle difficult to fathom.
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) March 1, 2026
खामेनेई की मौत पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। पार्टी ने X अकाउंट पर लिखा कि अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के उद्देश्य से किया गया ईरान पर हमला पूरी मानवता के विरुद्ध हमला है। हज़ारों बेकसूरों ने अपनी जान गंवाई है। अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत के साथ भारत ने अपना एक दोस्त खो दिया है। इराक, लीबिया, सीरिया... अमेरिका ने जहाँ भी हमला किया, उन देशों को और वहाँ के नागरिकों के जीवन को अमेरिका ने बर्बाद कर दिया।
अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के उद्देश्य से किया गया ईरान पर हमला पूरी मानवता के विरुद्ध हमला है। हज़ारों बेकसूरों ने अपनी जान गंवाई है। अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत के साथ भारत ने अपना एक दोस्त खो दिया है।इराक, लीबिया, सीरिया... अमेरिका ने जहाँ भी हमला किया, उन देशों को…
— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) March 1, 2026
एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इसे ‘अतिक्रमण, अनैतिक और अवैध कृत्य’ करार दिया। उन्होंने विशेष रूप से नागरिकों के मारे जाने की संख्या का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह पूरा मामला क्षेत्र में अस्थिरता को जन्म दे सकता है।
Trump-Israel’s attacks on Iran are absolutely condemnable. This, especially when Iran-US talks were going on in Geneva. More than 200 people have been killed across Iran, including 108 who were killed when strikes hit a girls' school. Ayatollah Khamenei’s assassination is an…
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) March 1, 2026
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईरान में घट रही घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की खबरें भी शामिल हैं। उन्होंने सभी समुदायों से शांति बनाए रखने, शांति का समर्थन करने और तनाव या अशांति पैदा करने वाले किसी भी कार्य से बचने की अपील की है। जम्मू-कश्मीर सरकार, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर ईरान में मौजूद जम्मू-कश्मीर निवासियों, जिनमें छात्र भी शामिल हैं, की सुरक्षा और कुशलक्षेम सुनिश्चित करने के लिए निकट समन्वय में है।
Chief Minister has expressed deep concern over the unfolding developments in Iran, including reports of the killing of Iran’s Supreme Leader, Ayatollah Ali Khamenei. He has appealed to all communities to remain calm, uphold peace, and avoid any actions that could lead to tension…
— Office of Chief Minister, J&K (@CM_JnK) March 1, 2026
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस घटना को दुखद कहा और आतंक और संघर्ष के खिलाफ शांति की अपील की है।
Today marks a deeply tragic & shameful point in history with Israel & USA boasting about the killing of Iran’s beloved leader Ayatollah Ali Khanenei. What’s more disgraceful & shocking is the explicit & implicit support given by Muslim countries who chose convenience & expedience… pic.twitter.com/WoIBWtDwNI
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) March 1, 2026
महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर लिखा कि ईरान के सर्वोच्च नेता की शहादत पर मीरवाइज उमर फारूक द्वारा किए गए बंद के आह्वान के प्रति हम अपना पूर्ण समर्थन और एकजुटता व्यक्त करते हैं। यह शोक का दिन है, जो दुनिया को याद दिलाता है कि कहीं भी होने वाला अन्याय संपूर्ण मुस्लिम उम्माह और सत्य के लिए खड़े सभी लोगों को आहत करता है। शोक में एकजुट और प्रतिरोध में एकजुट होकर, हम ईरान के लोगों के साथ दृढ़ता से खड़े हैं।
Extending our full support and solidarity with the shutdown call of Mirwaiz Umar Farooq on the martyrdom of Iran’s Supreme Leader.This is a day of mourning to remind the world that injustice anywhere wounds the entire Muslim Ummah and all who stand for truth.United in grief and…
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) March 1, 2026
इसके अलाव, भारत के अलग-अलग राज्यों में खामेनेई की मौत पर शिया समुदाय के लोग मातम मना रहे हैं। दिल्ली और उत्तर प्रदेश से लेकर जम्मू-कश्मीर तक, देश के अलग-अलग हिस्सों में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं।
राजनीतिक संकेत और सामाजिक स्थितियाँ
इस घटना के व्यापक प्रभाव
खामेनेई की मौत पर ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है, जिससे प्रतीत होता है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक क्षण नहीं है बल्कि सांस्कृतिक-धार्मिक संवेदना को छूने वाला गहरा झटका है।
Iran announces 40 days of public mourning on Ayatollah Ali Khamenei's deathRead @ANI Story | https://t.co/1MroXuoytr#iran #ayatollah #death pic.twitter.com/wvIRGun1dr
— ANI Digital (@ani_digital) March 1, 2026
निष्कर्ष: अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत केवल एक नेतृत्व परिवर्तन नहीं है — यह वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों, युद्ध-शांति के विमर्श और अंतरराष्ट्रीय नैतिकता की बहस का मुद्दा है। भारतीय नेताओं की प्रतिक्रियाएँ इस बात का परिचायक हैं कि भारत अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में सीधे संलिप्तता की बजाय मानवता, सुरक्षा और शांति को प्राथमिकता देना चाहता है, जबकि घरेलू राजनीतिक दल इस घटना का उपयोग दशक भर से चल रही विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्नों को उजागर करने के लिए कर रहे हैं।