सोनारपुर, पश्चिम बंगाल: तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर उस समय हमला किया गया, जब वह कथित तौर पर चुनाव बाद हिंसा में मारे गए एक व्यक्ति के परिवार से मिलने सोनारपुर पहुंचे थे। अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई।

उन्होंने कहा, "वे मुझे मारना चाहते थे। पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई है। हम इस मामले की जानकारी निश्चित रूप से हाईकोर्ट को देंगे। राज्यपाल को भी इससे अवगत कराएंगे और अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।" टीएमसी का आरोप है कि कुछ भाजपा समर्थकों ने अभिषेक बनर्जी पर हमला किया। हालांकि इन आरोपों पर भाजपा की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है।

"यह पूरी तरह बीजेपी प्रायोजित घटना है"

अभिषेक बनर्जी ने कहा, "यह पूरी तरह बीजेपी प्रायोजित घटना है। देखिए उन्होंने क्या किया है। यही उनका लोकतंत्र का उदाहरण है। सरकार बने अभी एक महीना भी नहीं हुआ और पुलिस कहीं दिखाई नहीं दे रही है।" वहीं टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा क्यों हटाई गई। उन्होंने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी की जान को खतरा है।

डेरेक ओ'ब्रायन ने केंद्रीय गृह मंत्री से इस मामले पर मांगा जवाब

डेरेक ओ'ब्रायन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि देश की दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के लोकसभा नेता एक मृतक कार्यकर्ता के परिवार से मिलने गए थे, जहां उन पर हमला किया गया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से इस मामले पर जवाब मांगा। इससे पहले अभिषेक बनर्जी ने बताया था कि उन्होंने विश्वजीत पटनायक के परिवार से मुलाकात की। उनके अनुसार विश्वजीत पटनायक तृणमूल कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता थे, जिनकी हत्या ने चुनाव बाद पश्चिम बंगाल में हिंसा के माहौल को उजागर किया।

अराजकता के माहौल के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी- डेरेक ओ'ब्रायन

डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि किसी भी परिवार को ऐसी त्रासदी नहीं झेलनी चाहिए। पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान उन्हें दुख के साथ-साथ न्याय की मजबूत उम्मीद भी दिखाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भय और अराजकता के माहौल के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी और पीड़ितों को न्याय दिलाने का प्रयास करेगी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल कर राज्य में पहली बार सरकार बनाई थी, जबकि तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा।