देशभर में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रही बहस के बीच वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी अपनी आवाज बुलंद की है। दिल्ली में जारी छात्र आंदोलन के समर्थन में उन्होंने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पूर्व अहमदनगर) स्थित वाडिया पार्क में दो घंटे का मौन सत्याग्रह किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों की समस्याओं को लेकर गहरी चिंता जताई और सरकार से आग्रह किया कि आंदोलन को टकराव की बजाय संवाद के जरिए सुलझाया जाए।

मौन प्रदर्शन के दौरान अन्ना हजारे भावुक भी हो गए। छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है।

'बातचीत से निकले समाधान'

मौन सत्याग्रह के बाद अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं तो सरकार को भी उनसे संवाद स्थापित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान बातचीत से ही निकल सकता है। सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच संवाद शुरू होने से स्थिति सामान्य हो सकती है और छात्रों का भरोसा भी मजबूत होगा।

वाडिया पार्क में दो घंटे का मौन प्रदर्शन

अहिल्यानगर के वाडिया पार्क में आयोजित यह मौन प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग भी वहां मौजूद रहे और छात्रों के समर्थन में अपनी एकजुटता दिखाई।

अन्ना हजारे ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा व्यवस्था केवल परीक्षा कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्रों के विश्वास और भविष्य की रक्षा करना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को अनदेखा करना किसी भी लोकतंत्र के लिए उचित नहीं होगा।

पहले भी प्रधानमंत्री को लिख चुके हैं पत्र

मौन प्रदर्शन से पहले अन्ना हजारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिख चुके हैं। पत्र में उन्होंने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने लिखा था कि लोकतंत्र में संवाद हमेशा टकराव से बेहतर विकल्प होता है और सरकार को छात्रों की बात सुनने के लिए आगे आना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा था कि यदि किसी मामले में जवाबदेही तय करने के लिए किसी मंत्री के इस्तीफे पर विचार किया जाता है तो इससे सरकार कमजोर नहीं होती। बल्कि इससे शासन व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता का संदेश जाता है।

छात्रों के भविष्य को बताया सबसे अहम मुद्दा

अन्ना हजारे ने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है और इसलिए छात्रों से जुड़े हर मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य समाधान होना चाहिए, न कि टकराव को बढ़ाना।

उन्होंने अपील की कि सभी पक्ष संयम बनाए रखें और ऐसी स्थिति बनने से बचें जिससे छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़े।

लोकतांत्रिक मूल्यों पर दिया जोर

अपने संबोधन में अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद, सहमति और शांतिपूर्ण विरोध है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारी यदि एक-दूसरे की बात सुनें तो कई जटिल समस्याओं का समाधान आसानी से निकाला जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश के युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं का सम्मान करना हर लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सकारात्मक पहल की जानी चाहिए।

फिलहाल छात्रों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। ऐसे समय में अन्ना हजारे का यह मौन सत्याग्रह इस पूरे घटनाक्रम को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ती है या नहीं।