हैदराबाद: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय जनगणना की विश्वसनीयता से समझौता करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) में खुले में शौच और खाना पकाने के ईंधन से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों को शामिल नहीं किया गया, जिससे जनगणना की सटीकता प्रभावित हो सकती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में ओवैसी ने कहा, "झूठ तीन प्रकार के होते हैं- झूठ, सफेद झूठ और आंकड़े। परिसीमन, विकास योजनाओं और खाद्य सुरक्षा के लिए जनगणना के आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण हैं। मोदी सरकार केवल आलोचना से बचने के लिए जनगणना की विश्वसनीयता को खतरे में डाल रही है।" ओवैसी ने दावा किया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के नवीनतम संस्करण में खुले में शौच, खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और कुछ अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक सूचनाओं का संग्रह बंद कर दिया गया है।
“There are three kinds of lies: lies, damned lies, and statistics.”Census data is essential for delimitation, development schemes and food security. The Modi govt is putting the integrity of census at risk just so that it’s not embarrassed. The latest National Family Health… https://t.co/UnfduOKpBg
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) June 5, 2026
आंकड़ों और सरकारी रिकॉर्ड में पाया गया अंतर
यह टिप्पणी उन रिपोर्टों के बाद आई है जिनमें बताया गया कि जनगणना के दौरान फील्ड स्तर पर जुटाए गए आंकड़ों और सरकारी रिकॉर्ड में अंतर पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कई गांवों को खुले में शौच मुक्त घोषित किए जाने, एलपीजी कनेक्शन होने के बावजूद गोबर के उपले, मिट्टी के तेल या फसल अवशेषों के उपयोग तथा बिजली की उपलब्धता को लेकर विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद अधिकारियों ने गणनाकर्मियों को दोबारा सत्यापन करने के निर्देश दिए।
असुद्दीन ओवैसी ने की 'SIR' प्रक्रिया की आलोचना
इससे पहले ओवैसी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की भी आलोचना की थी। उनका दावा है कि 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 6.5 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया "बहिष्कृत भारतीयों का एक स्थायी वर्ग" बनाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के तहत SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने का अर्थ नागरिकता समाप्त होना नहीं है।
"लगभग 27 लाख लोगों के मामले अभी विचाराधीन हैं"
ओवैसी ने कहा कि लगभग 27 लाख लोगों के मामले अभी विचाराधीन हैं और वे फॉर्म-6 के माध्यम से दोबारा मतदाता पंजीकरण करा सकते हैं। ओवैसी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का सबसे अधिक असर मुसलमानों, महिलाओं, गरीबों और प्रवासी समुदायों पर पड़ रहा है। उन्होंने जनसंख्या और प्रजनन दर से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित अध्ययन समिति की आवश्यकता पर भी सवाल उठाए।
असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की KYC, SIR और विभिन्न दस्तावेजी प्रक्रियाओं के जरिए जांच की जाती है, लेकिन सरकार स्वयं किसी जांच या जवाबदेही के दायरे में नहीं आना चाहती। उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग वर्तमान में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के तीसरे चरण का संचालन कर रहा है, जिसमें 36 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल हैं। यह प्रक्रिया जनगणना की हाउस-लिस्टिंग गतिविधियों के साथ समन्वय में चलाई जा रही है।
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