जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल की स्थिति का जायजा लेने पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को स्कूल के निरीक्षण को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। CJP की ओर से कार्यकर्ताओं और उनकी गाड़ियों पर हमला किए जाने का आरोप लगाया गया है।

घटना के बाद ग्रामीण स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए और CJP टीम के गांव में प्रवेश का विरोध किया। पार्टी के मुताबिक, उसके को-कन्वीनर आशुतोष रांका भी मौके पर पहुंच रहे थे। इस घटना ने राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति और स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है।

ग्रामीणों ने क्यों किया विरोध?

CJP टीम के स्कूल पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने गांव के मुख्य रास्ते पर निगरानी शुरू कर दी थी। आने-जाने वाले वाहनों की जांच की जा रही थी। ग्रामीणों का कहना था कि स्कूल की स्थिति सुधारने के लिए वे खुद प्रयास कर रहे हैं और सरकार की ओर से भी स्कूल के निर्माण तथा सुधार के लिए करीब 12.50 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।

ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में आकर निरीक्षण करने की अनुमति नहीं देंगे। इसके बाद स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू हो गई।

CJP की ओर से आरोप लगाया गया कि विरोध के दौरान उनके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और वाहनों को भी निशाना बनाया गया। हालांकि, घटना को लेकर सामने आए आरोपों के अलग-अलग पक्ष हैं और उपलब्ध जानकारी में ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है।

CJP ने स्कूल की हालत पर उठाए सवाल

CJP का दावा है कि रामपुरा कंवरपुरा का सरकारी स्कूल लंबे समय से खराब स्थिति में है। पार्टी के मुताबिक, स्कूल भवन की हालत ऐसी हो गई है कि बच्चों को मुख्य भवन से हटाकर करीब 50 मीटर दूर एक दूसरी जगह पढ़ाया जा रहा है।

CJP का आरोप है कि बच्चों की कक्षाएं टीनशेड के नीचे चल रही हैं और आसपास पशुओं का चारा भी रखा हुआ है। पार्टी ने स्कूल की स्थिति को लेकर कई सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल मिलना चाहिए

पार्टी इसी मुद्दे को लेकर राजस्थान के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत CJP कार्यकर्ता स्कूलों में भवन की स्थिति, पढ़ाई की व्यवस्था, विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं और दूसरी बुनियादी व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाने का दावा कर रहे हैं।

आशुतोष रांका ने सरकार पर साधा निशाना

CJP के को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने घटना को लेकर राजस्थान सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सामने लाने के लिए पार्टी का अभियान जारी रहेगा।

रांका ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था की कमियों को सामने लाने के बजाय सरकार इस तरह के निरीक्षणों को रोकने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी सरकार के किसी भी दबाव से पीछे नहीं हटेगी।

रांका ने सोशल मीडिया पर रामपुरा कंवरपुरा स्कूल की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, बच्चों को ऐसी जगह पढ़ाया जा रहा है जिसे उन्होंने 'भैंसों का तबेला' बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल की स्थिति सामने लाने पहुंची CJP टीम के कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई।

 

हालांकि, रांका द्वारा लगाए गए राजनीतिक और अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।

स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री पर भी विवाद

रामपुरा की घटना का संबंध पिछले दिनों स्कूल निरीक्षण को लेकर शुरू हुए विवाद से भी जुड़ा है। CJP की ओर से सरकारी स्कूलों के दौरे किए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल परिसरों में आम लोगों और मीडिया के प्रवेश को लेकर निर्देश जारी किए थे।

इसके बाद स्कूलों के निरीक्षण को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ गया। CJP का कहना है कि सरकारी स्कूलों की स्थिति जानना और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की पड़ताल करना जरूरी है। दूसरी ओर, स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर प्रशासनिक स्तर पर नियमों और अनुमति की जरूरत का मुद्दा सामने आया है।

CJP ने जयपुर के एक अन्य सरकारी स्कूल का भी दौरा करने की योजना बनाई थी। पार्टी की टीम शैक्षणिक व्यवस्था, भवन की स्थिति और छात्रों को उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लेने वाली थी।

राजस्थान से महाराष्ट्र तक शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा

CJP ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर अपने अभियान को राजस्थान तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

रामपुरा कंवरपुरा की घटना ने एक साथ दो मुद्दों को सामने ला दिया है। पहला, सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की स्थिति। दूसरा, राजनीतिक दलों और संगठनों द्वारा स्कूलों के निरीक्षण को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बढ़ता विवाद।

फिलहाल इस घटना के बाद दोनों पक्षों के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। CJP ने अपना स्कूल निरीक्षण अभियान जारी रखने की बात कही है, जबकि ग्रामीणों का रुख भी स्पष्ट है कि बाहरी लोगों को स्कूल परिसर में निरीक्षण की अनुमति नहीं दी जाएगी।