पणजी, गोवा: गोवा पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए कूरियर कंपनियों, डाक सेवा संचालकों और वितरण एजेंसियों को भी अपने अभियान में शामिल किया है। पुलिस के अनुसार, तस्कर सामान्य पार्सल और डाक सेवाओं के जरिए गांजा, चरस और सिंथेटिक नशीले पदार्थों की तस्करी कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य संदिग्ध पार्सलों की पहचान कर संगठित नशा तस्करी नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करना है।
गोवा पुलिस ने पणजी में कूरियर और डाक एजेंसियों के 80 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान अधिकारियों ने संदिग्ध पार्सलों की पहचान करने और उनकी जानकारी पुलिस तक पहुंचाने को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए। पुलिस के अनुसार, खास तौर पर ऐसे पार्सलों पर नजर रखने को कहा गया है, जिनमें छद्म नाम से बुकिंग, अधूरी प्रेषक या प्राप्तकर्ता जानकारी, असामान्य पैकेजिंग और घोषित कीमत से मेल न खाने वाली महंगी वस्तुएं शामिल हों।
सामान्य सामान में छिपाकर भेजे जा रहे नशीले पदार्थ
पुलिस जांच में सामने आया है कि नशा तस्कर रोजमर्रा की वस्तुओं के भीतर नशीले पदार्थ छिपाकर उन्हें कूरियर के माध्यम से भेज रहे हैं। नशीले पदार्थ विरोधी प्रकोष्ठ की जांच में कथित तौर पर ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एलएसडी और अन्य सिंथेटिक नशीले पदार्थों को किताबों, फोटो फ्रेम और अन्य सामान्य वस्तुओं में छिपाकर भेजा गया। पुलिस का मानना है कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी नेटवर्क गोवा को नशीले पदार्थों के परिवहन के लिए एक पारगमन केंद्र के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
‘कूरियर कर्मी बन सकते हैं शुरुआती चेतावनी तंत्र’
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, कूरियर कंपनियों और वितरण कर्मियों को अभियान से जोड़ने से एक प्रभावी शुरुआती चेतावनी तंत्र तैयार किया जा सकता है, क्योंकि संदिग्ध पार्सल सबसे पहले इन्हीं कर्मचारियों के संपर्क में आते हैं। अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत कूरियर और डाक सेवा संचालकों के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम, जानकारी साझा करने की व्यवस्था और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
नशे के पैसे की जांच में भी सामने आया कूरियर नेटवर्क
रिपोर्ट के अनुसार, नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े धनशोधन मामलों की जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी ऐसे संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जो नशीले पदार्थों की आवाजाही के लिए कूरियर सेवाओं के साथ-साथ डिजिटल भुगतान और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में पुलिस का मानना है कि नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को केवल सड़क और सीमावर्ती इलाकों तक सीमित रखने के बजाय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तक विस्तारित करना जरूरी है।
तीन वर्षीय कार्ययोजना के तहत कार्रवाई
गोवा पुलिस की यह पहल केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत तैयार तीन वर्षीय कार्ययोजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य संगठित नशा आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ना और गोवा को नशीले पदार्थों के लिए पारगमन केंद्र बनने से रोकना है। पुलिस ने कूरियर और डाक सेवा संचालकों से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की अपील की है।
गोवा पुलिस को मिले 46 नए वाहन
नशे और अपराध के खिलाफ अभियान के बीच गोवा पुलिस को गश्त और निगरानी मजबूत करने के लिए 46 नए बोलेरो नियो प्लस वाहन भी मिले हैं। पणजी स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने वाहनों को हरी झंडी दिखाई। इन वाहनों की कुल लागत करीब 5.26 करोड़ रुपये बताई गई है और इन्हें सरकारी ई-मार्केटप्लेस के माध्यम से खरीदा गया।
12 वाहन राजमार्ग गश्त के लिए तैनात
इन 46 वाहनों में से 12 को विशेष रूप से राजमार्ग गश्त के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ये वाहन राज्य के प्रमुख मार्गों पर निगरानी करेंगे। इनमें जीपीएस नेविगेशन और वायरलेस संचार व्यवस्था होगी। प्रत्येक वाहन में तीन पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, जिनमें सशस्त्र पुलिसकर्मी भी शामिल होंगे।
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