हैदराबाद, तेलंगाना: हैदराबाद के नामपल्ली प्रदर्शनी मैदान में सोमवार को वार्षिक 'फिश प्रसादम' वितरण कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें देशभर से हजारों अस्थमा मरीज राहत की उम्मीद लेकर पहुंचे। यह पारंपरिक उपचार बथिनी गौड़ परिवार द्वारा दिया जाता है। इसमें एक छोटी जीवित मछली (सार्डिन फिंगरलिंग) के भीतर विशेष जड़ी-बूटियों का मिश्रण भरकर मरीज के गले में डाला जाता है। यह आयोजन हर वर्ष मृगशिरा कार्ति की शुरुआत के दौरान आयोजित किया जाता है, जिसे इस उपचार के लिए शुभ माना जाता है।

सोमवार शाम तक मैदान में लंबी-लंबी कतारें लग गई थीं। कई मरीज दूर-दराज के राज्यों से यहां पहुंचे थे। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक बैरिकेडिंग की व्यवस्था की है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। मैदान में चिकित्सा सहायता केंद्र, पेयजल सुविधाएं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं। वैज्ञानिक समुदाय के कुछ लोग इस उपचार की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग इसकी पारंपरिक मान्यता और अनुभवों के आधार पर इसमें विश्वास रखते हैं।

मरीज में 85 प्रतिशत तक राहत मिलने की संभावना

महाराष्ट्र से आए मरीज हनुमंथ ने कहा कि उन्हें इस उपचार से लगभग 85 प्रतिशत राहत महसूस हुई है। उन्होंने भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस प्रशासन की सराहना की। दिल्ली से पहली बार पहुंचे रामप्रवेश ने कहा कि आवास सहित सभी व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से की गई हैं। वहीं उत्तर प्रदेश की ऋतु ने भी तेलंगाना पुलिस की व्यवस्था और अनुशासन की तारीफ की।

बिहार से 15 से 20 लोगों के समूह के साथ आए रोहित कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त भोजन सहित कई बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यह फिश प्रसादम वितरण कार्यक्रम दो दिनों तक चलेगा। प्रशासन को उम्मीद है कि अगले दो दिनों में और अधिक मरीज पारंपरिक उपचार प्राप्त करने के लिए यहां पहुंचेंगे।