नई दिल्ली: अगर आप रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) के साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, बॉडी वॉश या अन्य एफएमसीजी उत्पाद खरीदते हैं, तो आने वाले महीनों में आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि बढ़ती लागत और महंगाई के दबाव को देखते हुए सितंबर तिमाही में कुछ उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है।
हालांकि कंपनी का कहना है कि कीमतों में बदलाव एक साथ नहीं किया जाएगा। बाजार की स्थिति और ग्राहकों की खरीद क्षमता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों में चरणबद्ध तरीके से फैसले लिए जाएंगे।
2% से 5% तक बढ़ सकती हैं कीमतें
कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही की तुलना में सितंबर तिमाही में लागत पर दबाव और बढ़ सकता है। अनुमान है कि इनपुट कॉस्ट में 2% से 5% तक की वृद्धि हो सकती है। इसी वजह से कंपनी अपने विभिन्न ब्रांडों की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है।
कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल लागत में बढ़ोतरी की भरपाई करना है, न कि ग्राहकों पर अनावश्यक बोझ डालना।
महंगाई की वजह क्या है?
एफएमसीजी सेक्टर इस समय कई मोर्चों पर लागत बढ़ने का सामना कर रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती लागत, परिवहन खर्च और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े दबाव कंपनियों की लागत बढ़ा रहे हैं।
इसके अलावा पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति, मानसून और एल नीनो जैसे कारकों पर भी कंपनियां लगातार नजर बनाए हुए हैं। इन परिस्थितियों का असर आने वाले महीनों में उत्पादन लागत पर पड़ सकता है।
पहले भी बढ़ चुके हैं दाम
यह पहली बार नहीं है जब HUL ने कीमतों में बदलाव का संकेत दिया हो। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी कंपनी ने कई उत्पादों की कीमतों में 2% से 5% तक की बढ़ोतरी की थी।
अब यदि लागत का दबाव बना रहता है, तो कंपनी एक बार फिर "कैलिब्रेटेड प्राइसिंग" रणनीति अपनाते हुए चुनिंदा उत्पादों के दाम बढ़ा सकती है। इसका मतलब है कि हर ब्रांड या हर उत्पाद की कीमत एक समान नहीं बढ़ेगी।
साबुन कारोबार पर सबसे ज्यादा असर
कंपनी के अनुसार, पिछले दो वर्षों से सबसे अधिक दबाव साबुन श्रेणी पर बना हुआ है। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के कारण इस सेगमेंट में लागत लगातार बढ़ रही है।
इसके चलते कुछ उपभोक्ता छोटे पैक या कम कीमत वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि प्रीमियम कैटेगरी के उत्पादों की मांग में अब भी अच्छी वृद्धि दर्ज की जा रही है।
इसी वजह से कंपनी अपने प्रीमियम ब्रांडों को मजबूत करने के साथ-साथ मास मार्केट सेगमेंट में भी संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
ग्रामीण और शहरी बाजार से मिल रहे सकारात्मक संकेत
कंपनी का कहना है कि पिछले कुछ समय में ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में मांग का स्तर लगभग समान हो गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहिया वाहनों और ट्रैक्टरों की बिक्री बढ़ना मांग में सुधार का संकेत माना जा रहा है। इससे एफएमसीजी कंपनियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में उपभोक्ता खर्च मजबूत बना रहेगा।
बॉडी वॉश और प्रीमियम सेगमेंट पर रहेगा फोकस
HUL का मानना है कि भारत में बॉडी वॉश जैसे प्रीमियम पर्सनल केयर उत्पादों की पहुंच अभी भी सीमित है। इसलिए कंपनी इस श्रेणी में नए उत्पाद और बेहतर ऑफर लाने की तैयारी कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे उपभोक्ताओं की आय बढ़ेगी, प्रीमियम उत्पादों की मांग में भी तेजी आ सकती है।
आय बढ़ी, लेकिन मुनाफे पर दबाव
अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी की कुल आय में सालाना आधार पर करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद बढ़ती लागत का असर मुनाफे पर दिखाई दिया और शुद्ध लाभ में गिरावट दर्ज हुई।
कंपनी का कहना है कि भविष्य में भी वह लागत नियंत्रण, उत्पाद नवाचार और संतुलित मूल्य निर्धारण के जरिए कारोबार को मजबूत बनाए रखने की दिशा में काम करेगी।
उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने हैं?
अगर प्रस्तावित मूल्य वृद्धि लागू होती है, तो आने वाले महीनों में साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर खर्च बढ़ सकता है। हालांकि कीमतों में बदलाव सभी उत्पादों पर एक साथ नहीं होगा।
उपभोक्ताओं के लिए यह समय अपने मासिक घरेलू बजट पर नजर रखने का हो सकता है, जबकि बाजार विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़ती लागत के बीच कंपनियां कीमतों और बिक्री के बीच संतुलन कैसे बनाए रखती हैं।
Add GTC Bharat on Google