नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते का स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को लेकर कई गंभीर चिंताएं भी जताईं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा कि 19 जून को अमरीका और ईरान के बीच जिनेवा में होने वाले संभावित समझौते की खबर सकारात्मक है, हालांकि इसके सभी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। 

उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका, ईरान और इजरायल इस समझौते का पालन करेंगे और यह क्षेत्र में स्थायी शांति तथा संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से भारत को राहत

जयराम रमेश ने कहा कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुल जाता है तो इससे भारत को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है। हालांकि उन्होंने कहा कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की गहरी संरचनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

अर्थव्यवस्था को लेकर जताई चिंता

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पश्चिम एशिया संकट से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि रुपया पिछले एक वर्ष से दबाव में है। डॉलर की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है। निजी निवेश कई वर्षों से कमजोर बना हुआ है। वास्तविक मजदूरी (रियल वेज) में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। चीन से आयात पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है। कर विभाग और जांच एजेंसियों की शक्तियों के कारण निवेश माहौल प्रभावित हुआ है।

विदेश नीति पर भी उठाए सवाल

जयराम रमेश ने भारत की पश्चिम एशिया नीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हितों की दृष्टि से क्षेत्र में अधिक संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़राइल नीति की अप्रत्यक्ष आलोचना करते हुए कहा कि भारत के दीर्घकालिक हित, मानवीय दृष्टिकोण और क्षेत्र के साथ उसके ऐतिहासिक संबंध एक संतुलित नीति की मांग करते हैं।

पाकिस्तान और चीन का भी किया जिक्र

अपने बयान में उन्होंने यह भी दावा किया कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान अब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर फिर से प्रभाव बढ़ाता दिखाई दे रहा है। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान की रणनीतिक संरचना में चीन की बढ़ती भूमिका को भारत की विदेश नीति के लिए एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक चुनौती बताया।

क्या है मामला?

जयराम रमेश की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए संभावित समझौते की खबरें सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।