नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए ‘संसद चलो’ मार्च को अब करीब दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन 20 जुलाई की उस हिंसक झड़प पर सियासत अभी थमी नहीं है। मामला अब सिर्फ सड़क या प्रेस कॉन्फ्रेंसों तक सीमित नहीं रहा- यह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां पैलेट गन के इस्तेमाल और पुलिस कार्रवाई की वैधता को लेकर सुनवाई जारी है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था। सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार झड़प हुई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और संसद मार्ग, जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ होते हुए विजय चौक तक पहुंच गए। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, और दावा किया गया कि पैलेट गन का भी इस्तेमाल हुआ। इस झड़प में सौ से ज्यादा लोग घायल हुए, इनमें प्रदर्शनकारी भी थे और पुलिसकर्मी भी।
CJP का आरोप रहा है कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिसमें कई छात्र घायल हुए। वहीं दिल्ली पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने, संसद की ओर बढ़ने और सुरक्षाकर्मियों पर पथराव करने की कोशिश की, जिसके बाद हालात नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।
घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की पहली प्रतिक्रिया
इस हफ्ते पहली बार घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिवार खुलकर मीडिया के सामने आए। एक घायल सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने बताया कि उनके पिता भारतीय नौसेना में मरीन कमांडो रह चुके हैं और 15 साल देश की सेवा करने के बाद दिल्ली पुलिस में आए। उनके मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने उनके पिता को घसीटा, उनकी वर्दी खून से लथपथ हो गई, और वे कई घंटों तक अस्पताल में बेहोश रहे। बेटी ने कहा कि सबसे ज्यादा तकलीफ तब हुई जब सोशल मीडिया पर उनके पिता को ही अपराधी की तरह पेश किया जाने लगा।
#WATCH | Delhi | Daughter of a Delhi Police SI (Sub-Inspector) who sustained injuries during the clash between Police and protesters in Delhi, says, "...Before joining the police, my father served as a Marine Commando in the Indian Navy. He dedicated 15 years of his life to the… pic.twitter.com/aevnbcdNyQ
— ANI (@ANI) July 31, 2026
#WATCH | Delhi | Wife of a Delhi Police ACP, who sustained injuries during the clash between Police and CJP protesters in Delhi on 20th July says, "The moment he returned home late on the night of July 20, injured as he was, was incredibly painful and traumatic for both me and my… pic.twitter.com/lI40EMWnRI
— ANI (@ANI) July 31, 2026
एक घायल एसीपी की पत्नी ने कहा कि ड्यूटी से घायल हालत में पति का घर लौटना उनके परिवार, खासकर उनकी दो साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक पल था।
इसी बीच दिल्ली पुलिस महासंघ ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कार्रवाई का बचाव किया। पूर्व एसीपी के.पी. कुकरेती ने कहा कि किसी भी मौके पर बल प्रयोग का आदेश गृह मंत्री नहीं देते। उनके मुताबिक, जब भीड़ हिंसक हो जाए, बैरिकेड तोड़ दे, पथराव करे और कानून-व्यवस्था को चुनौती दे, तब मौके पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारी ही हालात के अनुसार फैसला लेते हैं।
#WATCH | Delhi Police Mahasangh holds a press conference | Former ACP KP Kukreti says, "There are responsible leaders sitting on the floor of Parliament. They have never been police officers, nor have they undergone any police training, and they are not legal experts. I do not… pic.twitter.com/mqbWWUb5Q6
— ANI (@ANI) July 31, 2026
CJP और कांग्रेस का जवाब
दिल्ली पुलिस और पुलिस महासंघ के दावों के बाद CJP और कांग्रेस ने भी अपना पक्ष रखा।
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा के इस्तेमाल की आलोचना की जा सकती है, लेकिन इसके लिए पुलिस और आपराधिक कानून का इस्तेमाल कर युवाओं को निशाना बनाना गलत है। उन्होंने Noida की एक छात्रा के खिलाफ दर्ज FIR का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि क्या सिर्फ अपशब्द बोलना अब आपराधिक अपराध बन गया है, और यह भी कहा कि लोकसभा के आधे से ज्यादा सांसदों पर रेप, हत्या और डकैती जैसे गंभीर मामले दर्ज होने के बावजूद उन पर वैसी तत्परता नहीं दिखाई जाती।
#WATCH | Delhi: On FIR against Noida girl for using abusive language against PM Narendra Modi during protest at Jantar Mantar, Cockroach Janta Party Chief Spokesperson Saurav Das says, "One might condemn the use of abusive language during a protest. However, using the criminal… pic.twitter.com/BkOdx0flQb
— ANI (@ANI) July 31, 2026
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि हिंसा का शिकार चाहे कोई भी हो, उसे न्याय मिलना चाहिए, और जिसने भी हिंसा की उसके खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांगा जा सकता है, तो पैलेट गन कांड की जिम्मेदारी लेते हुए गृह मंत्री को भी इस्तीफा क्यों नहीं देना चाहिए।
#WATCH | Delhi: Congress MP Pawan Khera says, "Whoever is a victim of violence should get justice, and whoever has committed violence should also face action. But one thing we still want to know is that when papers are leaked, Dharmendra Pradhan’s resignation is demanded, holding… pic.twitter.com/dqrEu01dgZ
— ANI (@ANI) July 31, 2026
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही आरोप लगा चुके हैं कि संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई, शॉक बैटन का इस्तेमाल हुआ, और कील लगी लाठियों से पिटाई की गई। उनका दावा था कि इस कार्रवाई में एक छात्र की आंख की रोशनी तक चली गई। केंद्र सरकार और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उस दिन कोई गोली नहीं चली, और किसी केंद्रीय मंत्री के आदेश पर बल प्रयोग नहीं होता, यह अधिकार सिर्फ मौके पर मौजूद सक्षम मजिस्ट्रेट/अधिकारी का होता है।
दिल्ली सरकार ने कहा है कि CJP आंदोलन में शामिल अधिकांश प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आगे कोई नई कार्रवाई नहीं की जाएगी, हालांकि जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। CJP का कहना है कि सिर्फ कार्रवाई रोकना काफी नहीं, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR भी वापस ली जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का रुख - दोनों पक्षों की चिंताओं को मान्यता
इस पूरे विवाद की सबसे अहम सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण और वैधानिक प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, और सिर्फ प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस की सख्ती को सही नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला होना भी गंभीर चिंता का विषय है। यानी अदालत ने दोनों पक्षों की चिंताओं को समान महत्व दिया है।
सुनवाई के दौरान एक अहम तथ्य सामने आया: संसद मार्ग थाने की जनरल डायरी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 20 जुलाई को भीड़ नियंत्रित करने के लिए RAF ने 55 नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल, 15 इलेक्ट्रिकल शेल, 5 टियर स्मोक ग्रेनेड, 2 एंटी-रायट गन राउंड और प्लास्टिक पैलेट वाले 2 बैलिस्टिक कारतूस इस्तेमाल किए। रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि यह कार्रवाई मौके पर मौजूद DCP रैंक के अधिकारी के निर्देश पर हुई थी। यही रिकॉर्ड अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का हिस्सा है।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर कोर्ट ने फिलहाल पूरी तरह रोक लगाने से इनकार किया है। कोर्ट का कहना है कि संबंधित नियमों को चुनौती दिए बिना ब्लैंकेट बैन नहीं लगाया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने दिल्ली सरकार को घायल प्रदर्शनकारियों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने और केंद्र सरकार को RAF द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों-गोला-बारूद का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
भारत में पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। इसे भीड़ नियंत्रण के लिए ‘कम घातक’ हथियारों में गिना जाता है और असाधारण परिस्थितियों में इस्तेमाल की अनुमति है, हालांकि मानवाधिकार संगठन लंबे समय से इस पर सवाल उठाते रहे हैं।
फैसला अभी बाकी
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने न तो पुलिस कार्रवाई को पूरी तरह सही ठहराया है, न ही प्रदर्शनकारियों के सभी आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष दिया है। अदालत की नजर अब जांच, सबूतों और आधिकारिक रिकॉर्ड पर है। इस विवाद का अगला अध्याय, कोर्ट की आगे की सुनवाई और जांच के नतीजों से ही सामने आएगा।
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