नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि गांवों, खासकर भारत की सीमाओं से लगे गांवों का विकास, देश को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने युवाओं से जमीनी हकीकत से जुड़ने और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में योगदान देने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026’ के प्रतिभागियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समस्याओं, संस्कृति और लोगों की आकांक्षाओं को समझकर युवा देश के विकास के विजन को और व्यापक बना सकते हैं।
"विकसित गांव ही विकसित भारत की आधारशिला हैंठ"
पीएम मोदी ने कहा, “विकसित गांव ही विकसित भारत की आधारशिला हैं। विकसित भारत के निर्माण की यात्रा लगातार जारी है और इसमें देश के सभी युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। जब देश के युवा जमीनी स्तर से जुड़ते हैं, तो विकसित भारत का उनका विजन और व्यापक होता है।”
सीमावर्ती गांवों के विकास पर जोर
प्रधानमंत्री ने सीमावर्ती गांवों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वहां रहने वाले लोगों की देशभक्ति और कठिन परिस्थितियों में उनका जीवन युवाओं के संकल्प को और मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान युवाओं ने महसूस किया होगा कि सीमावर्ती गांवों में जीवन कितना चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद वहां रहने वाले लोग हर पल देशभक्ति की भावना के साथ जीते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक सीमावर्ती गांवों को केवल ‘देश के आखिरी गांव’ के रूप में देखा जाता था और उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता था। इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाओं की कमी थी। हालांकि, इन कठिनाइयों के बावजूद वहां रहने वाले लोगों की देशभक्ति कभी कम नहीं हुई।
#WATCH | During his interaction with the participants of the Viksit Vibrant Village Program 2026, Prime Minister Narendra Modi said, in our border villages, one witnesses a unique blend of the aspiration for development and a spirit of patriotism—at times, it seems as though the… pic.twitter.com/aBu0YGsmjs
— All India Radio News (@airnewsalerts) July 26, 2026
सीमावर्ती गांवों को ‘पहले गांव’ बनाने की पहल
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ को प्रधानमंत्री के उस विजन के तहत तैयार किया गया है, जिसमें भारत के सीमावर्ती गांवों को देश के ‘आखिरी गांव’ नहीं, बल्कि ‘पहले गांव’ के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को ‘विकसित भारत’ की यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाना है।
‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026’ का आयोजन 4 जून से 30 जून के बीच दो चरणों में किया गया। इसके तहत लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 वाइब्रेंट गांवों को शामिल किया गया। देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक युवाओं का चयन राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से किया गया। इस प्रतियोगिता में तीन लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया।
युवाओं ने गांवों में रहकर समझी जमीनी हकीकत
कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों ने स्थानीय समुदायों के साथ रहकर विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। इनमें स्वच्छता अभियान, सरकारी योजनाओं को लेकर जागरूकता अभियान, युवा सम्मेलन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम और पौधारोपण अभियान शामिल रहे। इसके अलावा युवाओं ने ‘मिनी मॉडल पंचायत’ गतिविधियों में हिस्सा लिया, स्थानीय कारीगरों से संवाद किया और रणनीतिक महत्व वाले संस्थानों का दौरा भी किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह के अनुभव युवाओं को देश की जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ते हैं और उन्हें राष्ट्र निर्माण में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।
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