नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया। संसद के भीतर लगातार हंगामे के बीच विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में गांधी स्मृति मार्च निकालकर सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सांसद इस मार्च में शामिल हुए और छात्रों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई पर सवाल उठाए।

सुबह संसद परिसर में कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद आमने-सामने आ गए। संसद के मकर द्वार पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाए, जिसके बाद सदन के भीतर भी जोरदार विरोध देखने को मिला। लगातार शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

गांधी स्मृति मार्च के जरिए जताया विरोध

संसद के बाहर विपक्षी दलों ने गांधी स्मृति मार्च निकालकर छात्रों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। मार्च में शामिल नेताओं का कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

मार्च के दौरान विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का रवैया संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

संसद के भीतर भी जारी रहा गतिरोध

मानसून सत्र के शुरुआती दिनों की तरह चौथे दिन भी सदन में सामान्य कामकाज प्रभावित रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार नारेबाजी होती रही, जिससे दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी।

संसद में विपक्ष ने छात्रों के मुद्दे, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और अन्य विषयों पर चर्चा की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष ने अपने रुख का बचाव करते हुए विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।