नई दिल्ली, भारत: कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा ने शुक्रवार को कहा कि उनके पास “छिपाने के लिए कुछ नहीं” है, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) “सरकार के इशारे पर काम कर रही है।” यह बयान उन्होंने शिकोहपुर भूमि सौदा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट से जमानत मिलने के बाद दिया।
सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत के साथ अधिवक्ता प्रतीक चड्ढा और अक्षत गुप्ता ने अदालत में रॉबर्ट वाड्रा की ओर से पैरवी की। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) मामले में अदालत में पेश होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए रॉबर्ट वाड्रा ने न्यायपालिका पर भरोसा जताया, लेकिन ईडी पर गंभीर आरोप लगाए।
"मुझे देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा है"
रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, “मुझे देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा है। मैं जानता हूं कि प्रवर्तन निदेशालय को सरकार चला रही है और ईडी सरकार के निर्देशों पर काम करती रहेगी। मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। मैं हमेशा यहां रहूंगा और हर सवाल का जवाब दूंगा।” खुद को “निर्भीक” बताते हुए रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं और मामले की आगे की कार्यवाही में सभी नियमों का पालन करेंगे।
#WATCH | Delhi | After being granted bail by Rouse Avenue Court in Shikohpur land deal money laundering case, businessman Robert Vadra says, "I believe in the judicial system of this country. I know that ED is being managed by the Government and the ED will keep on going on the… pic.twitter.com/P1DPlhScWM
— ANI (@ANI) May 16, 2026
शुक्रवार को रॉबर्ट वाड्रा राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए
इससे पहले शुक्रवार को रॉबर्ट वाड्रा शिकोहपुर भूमि सौदा PMLA मामले में जारी समन के तहत राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने पिछले महीने इस मामले में ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। यह घटनाक्रम दिल्ली हाईकोर्ट में रॉबर्ट वाड्रा की उस याचिका की सुनवाई के एक दिन बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट में रॉबर्ट वाड्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कथित मूल अपराध 2008 से 2012 के बीच के हैं, जबकि कुछ अपराधों को बाद में PMLA की अनुसूची में शामिल किया गया।
अगली सुनवाई 18 मई को निर्धारित
ईडी की ओर से पेश अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह कानून की गलत व्याख्या पर आधारित है। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने मामले की अगली सुनवाई 18 मई के लिए निर्धारित की है।
यह मामला फरवरी 2008 के उस भूमि सौदे से जुड़ा है, जिसमें स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड — जिसमें रॉबर्ट वाड्रा पहले निदेशक थे उन्होंने शिकोहपुर में करीब 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। बाद में यह जमीन 2012 में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेची गई, जिससे इसकी कीमत में भारी बढ़ोतरी हुई।
मामले में आगे की जांच जारी है
ईडी के अनुसार, यह सौदा अपराध से अर्जित धन को छिपाने और उसकी परतें बनाने की बड़ी साजिश का हिस्सा था। एजेंसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में जमीन का तेजी से म्यूटेशन और विकास अनुमति जैसे अनुचित लाभ दिए गए, जिससे उसकी बाजार कीमत काफी बढ़ गई।
अदालत ने ईडी की इस दलील पर भी ध्यान दिया कि मामले में आगे की जांच जारी है, खासकर FIR में नामित अन्य संस्थाओं की भूमिका को लेकर। अदालत ने उम्मीद जताई कि जांच एजेंसी सभी पहलुओं की गहन जांच करेगी ताकि मामले की व्यापक जांच सुनिश्चित हो सके।