नई दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दिपके ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने वांगचुक से अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि लंबे समय तक उपवास रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर देते हैं, तब भी आंदोलन और प्रदर्शन जारी रहेगा।
अभिजीत दिपके ने कहा कि सोनम वांगचुक का अनशन अब कई दिनों से जारी है और उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य लोगों की आवाज सरकार तक पहुंचाना होता है, लेकिन इसके लिए किसी की जान जोखिम में पड़ना उचित नहीं है।
'अनशन खत्म हो, लेकिन आंदोलन नहीं'
दिपके ने कहा कि संगठन की ओर से सोनम वांगचुक से केवल भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की गई है, आंदोलन समाप्त करने की नहीं। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन अपनी तय रणनीति के अनुसार आगे भी जारी रहेगा और जब तक प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने दोहराया कि संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रतिबद्ध है और लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाता रहेगा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई
CJP प्रमुख ने एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। उनका कहना है कि शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संगठन इसी मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेगा।
दिपके ने यह भी कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है।
समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील
अभिजीत दिपके ने अपने समर्थकों से प्रदर्शन के दौरान अनुशासन और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह अहिंसक रहेगा और किसी भी प्रकार की हिंसा या उग्र गतिविधि को संगठन का समर्थन नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति भड़काऊ नारे लगाता है या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करता है, तो उसका संगठन से कोई संबंध नहीं माना जाएगा। ऐसे लोगों को आंदोलन का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
गांधी और आंबेडकर के विचारों का दिया हवाला
अपने संबोधन में दिपके ने कहा कि उनका संगठन महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों का पालन करते हुए आंदोलन चला रहा है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध ही किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और संगठन भविष्य में भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि उन मुद्दों को उठाना है जिन्हें लेकर प्रदर्शनकारी अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं। इसी कारण उन्होंने सभी समर्थकों से संयम बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।
आंदोलन पर बनी हुई है सबकी नजर
राजधानी में चल रहे इस विरोध प्रदर्शन पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सोनम वांगचुक अनशन को लेकर क्या निर्णय लेते हैं और सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर आगे क्या रुख अपनाती है।
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