पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। पार्टी के भीतर जारी राजनीतिक हलचल के बीच अब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के साथ ही पिछले कुछ दिनों में राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले टीएमसी सांसदों की संख्या तीन हो गई है।

प्रकाश चिक बराइक ने गुरुवार को राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने का फैसला किया। इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन्होंने पश्चिम बंगाल की जनता द्वारा दिए गए जनादेश और बदलते राजनीतिक माहौल को ध्यान में रखते हुए लिया है। हालांकि उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा।

बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर दिया संकेत

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने जा रहे हैं, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा कि इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, खासकर तब जब कई नेता अपनी राजनीतिक दिशा बदलने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं।

आदिवासी समुदाय की मजबूत आवाज रहे हैं बराइक

प्रकाश चिक बराइक पश्चिम बंगाल के आदिवासी समाज से आने वाले प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। राज्यसभा सदस्य के रूप में उन्होंने विभिन्न संसदीय समितियों में सक्रिय भूमिका निभाई। वे उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण से संबंधित संसदीय स्थायी समिति के सदस्य रहे हैं। इसके अलावा जनजातीय मामलों से जुड़ी सलाहकार समिति में भी उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनके इस्तीफे से आदिवासी क्षेत्रों में भी राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

चार दिनों में तीसरा इस्तीफा

टीएमसी के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के दिनों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अलग रास्ता चुना है। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं।

लगातार हो रहे इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। विपक्षी दल इसे टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत बता रहे हैं, जबकि पार्टी की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रकाश चिक बराइक अपने अगले राजनीतिक कदम की घोषणा कब करते हैं।