नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता यानी UCC (Uniform Civil Code) को लेकर तैयारियों के बीच दो और प्रस्तावित कानून चर्चा में आ गए हैं। दिए गए विवरण के मुताबिक, UCC के बाद धर्मांतरण पर रोक लगाने और जमीन की खरीद-बिक्री या लेन-देन को नियंत्रित करने से जुड़े कानून लाने की तैयारी की जा रही है। शुभेंदु अधिकारी ने संकेत दिया है कि ये दोनों मुद्दे सरकार के अगले एजेंडे में शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने के बाद उनके सामने दो प्रमुख काम बाकी रहेंगे। इनमें पहला धर्मांतरण के खिलाफ कानून और दूसरा जमीन की खरीद-बिक्री से संबंधित कानून बताया गया है।

‘दो काम अभी बाकी हैं’

बांकुड़ा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र में जमीन, अवैध ओबीसी सूची, इमामों और मुअज्जिनों के भत्ते तथा अन्य मुद्दों पर सरकार पहले ही कदम उठा चुकी है।

उन्होंने कहा कि UCC लागू होने के बाद धर्मांतरण और जमीन के लेन-देन से जुड़े कानून लाना उनकी प्राथमिकता होगी। अधिकारी ने इस संबंध में कहा कि “ये काम मैं जरूर करूंगा।”

इस बयान के बाद इन दोनों प्रस्तावित कानूनों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है।

धर्मांतरण को लेकर क्या है दावा?

शुभेंदु अधिकारी ने धर्मांतरण के मुद्दे को विदेशी फंडिंग से भी जोड़कर देखा। उनके अनुसार जंगलमहल क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की परिस्थितियों का फायदा उठाकर धर्मांतरण की गतिविधियां होने का दावा किया गया है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए सरकार को कदम उठाने होंगे। हालांकि, दिए गए विवरण में प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून का पूरा प्रारूप, उसमें शामिल प्रावधान या उसके लागू होने की समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई है।

FCRA बिल पर भी सवाल

बातचीत के दौरान FCRA संशोधन विधेयक को लेकर भी सवाल पूछा गया। अधिकारी ने विदेशी फंडिंग और कट्टरपंथी गतिविधियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुछ समूह देश में विदेशी धन ला रहे हैं।

उन्होंने बांकुड़ा के जंगलमहल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए दावा किया कि विदेशी धन की मदद से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के बीच धर्मांतरण की गतिविधियां चल रही हैं। हालांकि, इन दावों के समर्थन में इस विवरण में कोई स्वतंत्र आंकड़ा या जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है।

UCC के लिए बनी समिति

पश्चिम बंगाल में UCC के ड्राफ्ट पर विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति गठित किए जाने की बात भी सामने आई है।

दिए गए विवरण के अनुसार, प्रस्तावित UCC का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। इसमें आदिवासी समुदायों को कुछ छूट दिए जाने की बात कही गई है।

समिति की भूमिका UCC के प्रस्तावित ड्राफ्ट की समीक्षा से जुड़ी बताई गई है। ऐसे में आने वाले समय में समिति की सिफारिशों और सरकार के अगले कदम पर नजर रहेगी।

मस्जिद और मंदिरों के लाउडस्पीकर का मुद्दा

इस बीच राज्य में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर भी विवाद का विषय बने हुए हैं। दिए गए विवरण के मुताबिक, पुलिस ने मस्जिदों और मंदिरों से लाउडस्पीकर हटाने का अभियान शुरू किया है।

पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर कानूनी बहस शुरू हो गई है।

आगे क्या?

UCC के साथ धर्मांतरण और जमीन के लेन-देन से जुड़े कानूनों की चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब राज्य में इन मुद्दों को लेकर राजनीतिक मतभेद पहले से मौजूद हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रस्तावित कानूनों का प्रारूप क्या होगा, किन गतिविधियों को इनके दायरे में रखा जाएगा और इन्हें लागू करने के लिए सरकार किस कानूनी प्रक्रिया को अपनाएगी।