नई दिल्ली: महिला आरक्षण कानून को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। रिजिजू की ओर से कांग्रेस से महिला आरक्षण बिल को बिना शर्त समर्थन देने की अपील के बाद राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए केंद्र से सवाल किया कि महिला आरक्षण के प्रावधान को परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 संसद में पहले ही पारित हो चुका है और कांग्रेस ने इसका पूरा समर्थन किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि तीन साल बीत जाने के बाद भी इसे लागू क्यों नहीं किया गया। राहुल गांधी ने कहा, "2023 के कानून को लागू करें। बिना किसी शर्त के।"
Congress MP and Lok Sabha LoP Rahul Gandhi shared a social media post, "Rijiju ji, as the Union Parliamentary Affairs Minister, who would know this better than you? The Women’s Reservation Bill was unanimously passed in 2023, with the full support of the Congress. The question… pic.twitter.com/6TPRr4MVPv
— United News of India (@uniindianews) August 8, 2026
रिजिजू ने कांग्रेस से मांगा था समर्थन
इससे पहले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के महिलाओं की स्वतंत्र अभिव्यक्ति को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस से महिला आरक्षण बिल का बिना शर्त समर्थन करने को कहा था। रिजिजू ने कहा था कि राहुल गांधी के महिलाओं को लेकर विचारों में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है और उम्मीद है कि कांग्रेस अब महिला आरक्षण बिल का बिना शर्त समर्थन करेगी।
परिसीमन को लेकर क्या है विवाद?
महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इसके लागू होने की प्रक्रिया को जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल महिला आरक्षण के समर्थन में हैं, लेकिन वे आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ने का विरोध करते रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि महिला आरक्षण को जल्द लागू किया जाए और इसे परिसीमन की शर्त से अलग रखा जाए।
2023 में संसद से पास हुआ था कानून
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिली थी। इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया। हालांकि, आरक्षण के वास्तविक क्रियान्वयन की प्रक्रिया परिसीमन से जुड़ी हुई है। इसी मुद्दे को लेकर अब सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
राहुल गांधी ने अपने ताजा बयान में इसी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब कानून संसद से पारित हो चुका है और कांग्रेस ने उसका समर्थन किया है, तो उसके क्रियान्वयन में अतिरिक्त शर्तें क्यों रखी जा रही हैं। अब महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।
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