नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के महिलाओं की अभिव्यक्ति और स्वतंत्रता को लेकर दिए बयान का स्वागत किया है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस से महिला आरक्षण बिल का बिना शर्त समर्थन करने की चुनौती भी दी।

रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी के बयान को साझा करते हुए कहा कि कांग्रेस की ओर से यह एक सकारात्मक संदेश नजर आता है। उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी के महिलाओं को लेकर नजरिए में बदलाव दिखाई दे रहा है और अब उम्मीद है कि कांग्रेस Women's Reservation Bill को बिना किसी शर्त के समर्थन देगी।

राहुल गांधी ने महिलाओं की अभिव्यक्ति पर क्या कहा?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि भारत की महिलाओं की ऊर्जा और उनकी आवाज को पूरी तरह सामने आने का अवसर नहीं मिल रहा है। उनके मुताबिक, कोई भी देश तब तक पूरी तरह सफल नहीं हो सकता, जब तक उसकी महिलाएं अपनी बात खुलकर व्यक्त नहीं कर पातीं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रगति सिर्फ राजनीति और कारोबार में आगे बढ़ने तक सीमित नहीं है। उन्हें अपने घरों में अपनी बात रखने, सड़कों पर सुरक्षित महसूस करने और माता-पिता, पति या भाई से असहमति जताने की भी आजादी होनी चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अगर भारत को विकास करना है तो महिलाओं को पितृसत्तात्मक सोच और पुरुषों के कठोर नियंत्रण से पर्याप्त स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

रिजिजू ने महिला आरक्षण बिल का मुद्दा क्यों उठाया?

रिजिजू ने राहुल गांधी के इस बयान को कांग्रेस के रुख में संभावित बदलाव से जोड़ते हुए महिला आरक्षण कानून पर समर्थन मांगा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था।

हालांकि, इसके क्रियान्वयन को परिसीमन और जनगणना से जोड़ा गया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल महिला आरक्षण का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन उन्होंने इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति जताई है। विपक्ष की मांग रही है कि महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग किया जाए।

महिला आरक्षण कानून का क्या हुआ?

महिला आरक्षण से संबंधित संवैधानिक संशोधन को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिली थी। हालांकि, इसके आगे लागू होने की प्रक्रिया में जनगणना और परिसीमन की शर्तें महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में रिजिजू का ताजा बयान उस राजनीतिक बहस को फिर से सामने लाता है, जिसमें महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आरक्षण और परिसीमन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद रहे हैं।

फिलहाल, राहुल गांधी के बयान के बाद रिजिजू ने कांग्रेस के सामने स्पष्ट चुनौती रखी है कि अगर पार्टी महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है, तो उसे महिला आरक्षण बिल का बिना शर्त समर्थन करना चाहिए।