नई दिल्ली: राज्यसभा ने मंगलवार को अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 (Tribunals Reforms Bill, 2026) पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य देशभर में अधिकरणों के कामकाज, प्रशासन और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार करना है। विधेयक में अधिकरणों के सदस्यों की नियुक्ति और सेवा शर्तों में पारदर्शिता तथा एकरूपता सुनिश्चित करने के साथ राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (National Tribunals Commission) स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है।
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि प्रस्तावित राष्ट्रीय अधिकरण आयोग अधिकरण व्यवस्था में सुधारों का केंद्र होगा। उन्होंने कहा कि आयोग अधिकरणों के लिए एक स्वतंत्र, पारदर्शी और व्यवस्थित संस्थागत ढांचा उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगा। मेघवाल ने कहा कि जिस तरह सड़क, रेल, हवाई अड्डे और बंदरगाह देश के विकास के लिए जरूरी हैं, उसी तरह कानूनी बुनियादी ढांचा भी देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।
विवादों के त्वरित निपटारे पर जोर
कानून मंत्री ने कहा कि विवादों के तेजी से निपटारे के लिए प्रभावी व्यवस्था का अभाव अभी भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि कुशल अधिकरण व्यवस्था भारत की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण आधार है। सरकार का मानना है कि विशेषज्ञता वाले मामलों के लिए प्रभावी अधिकरण व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकता है।
#MonsoonSession #RajyaSabha में ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल 2026 पारित हो गया.इस विधेयक में विभिन्न राष्ट्रीय न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल) में नियुक्तियों की निगरानी के लिए एक पैनल गठित करने का प्रावधान है.नए बिल के तहत राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग बनाया जाएगा. यही ट्रिब्यूनलों के… pic.twitter.com/NYY1gC1MA4
— SansadTV (@sansad_tv) August 11, 2026
संविधान के अनुच्छेद 323A और 323B में अधिकरणों का आधार
मेघवाल ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 323A और 323B में अधिकरणों का संवैधानिक आधार दिया गया है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 323A संसद को सरकारी सेवाओं से जुड़े मामलों के लिए प्रशासनिक अधिकरण स्थापित करने का अधिकार देता है। वहीं, अनुच्छेद 323B अन्य विशेष विषयों से संबंधित मामलों के लिए अधिकरण स्थापित करने का संवैधानिक ढांचा प्रदान करता है।
1941 में बना ITAT, अधिकरण व्यवस्था का पुराना उदाहरण
कानून मंत्री ने बताया कि भारत में अधिकरण व्यवस्था आजादी से पहले भी मौजूद थी। उन्होंने आयकर अपीलीय अधिकरण (Income Tax Appellate Tribunal- ITAT) का उदाहरण देते हुए कहा कि 1941 में स्थापित ITAT को अधिकरण व्यवस्था की शुरुआती और महत्वपूर्ण संस्थाओं में माना जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकरणों का उद्देश्य नियमित अदालतों का स्थान लेना नहीं है। इनका उद्देश्य कराधान, कंपनी कानून, पर्यावरण, प्रतिभूति बाजार और बौद्धिक संपदा जैसे विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
नियुक्तियों में पारदर्शिता और एकरूपता का प्रस्ताव
अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 में विभिन्न अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता लाने पर जोर दिया गया है।राष्ट्रीय अधिकरण आयोग के माध्यम से नियुक्तियों और अधिकरणों के प्रशासन के लिए अधिक संगठित संस्थागत व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव है। यह विधेयक इससे एक दिन पहले सोमवार को लोकसभा से भी पारित हो चुका है। लोकसभा में विपक्ष के लगातार विरोध के बीच इसे बिना विस्तृत चर्चा के पारित किया गया।
विपक्षी सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग को लेकर विरोध कर रहे थे। सरकार का कहना है कि देश के आर्थिक विकास के साथ मजबूत और प्रभावी कानूनी बुनियादी ढांचा भी जरूरी है। अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 के जरिए केंद्र सरकार अधिकरण व्यवस्था को अधिक स्वतंत्र, पारदर्शी, एकरूप और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। राज्यसभा से विधेयक पारित होने के बाद अब इसके आगे की विधायी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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