नई दिल्ली: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण की सराहना की। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस रॉकेट की सफलता को उन्होंने हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण और देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "मैं कहूंगा- भारत को बधाई। हर भारतीय गर्व महसूस कर रहा है और स्काईरूट को भी बधाई, जो श्रीहरिकोटा से यह प्रक्षेपण करने वाली पहली निजी कंपनी बनी है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। अगर उन्होंने पांच-छह साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने और श्रीहरिकोटा के दरवाजे निजी कंपनियों के लिए खोलने का साहसिक और अलग सोच वाला फैसला नहीं लिया होता, तो आज हम यह उपलब्धि नहीं देख पाते।"

भारत की स्पेस इकोनॉमी, स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई

केंद्रीय मंत्री ने कहा महज आधे दशक में भारत की स्पेस इकोनॉमी और स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा, "आज प्रधानमंत्री मोदी के फैसले की सफलता सामने है। सिर्फ पांच वर्षों में स्पेस इकोनॉमी और स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या में क्वांटम लीप आया है। इतने कम समय में हमने एक यूनिकॉर्न भी तैयार किया है और वह कोई और नहीं, बल्कि स्काईरूट है।" 

जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी स्काईरूट एयरोस्पेस को विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग पर बधाई दी। उन्होंने इसे भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल बताया। उन्होंने लिखा कि यह मिशन भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और अंतरिक्ष तकनीक में देश की बढ़ती क्षमता तथा तेजी से विकसित हो रही स्पेस इकोनॉमी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में भारत की स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।  उन्होंने कहा कि भारत की स्पेस इकोनॉमी में तेजी से विस्तार हुआ है और आने वाले वर्षों में इसमें और बढ़ोतरी की उम्मीद है।

जितेंद्र सिंह ने कहा, "एक समय हमारी स्पेस इकोनॉमी काफी छोटी थी, लेकिन आज हम करीब 9 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुके हैं और उम्मीद है कि एक दशक से भी कम समय में यह लगभग 40-45 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी। आज की सफल लॉन्चिंग इस बात की पुष्टि है कि भारत स्पेस इकोनॉमी के बेहद प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में एक वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है। भारत लगातार ऊंचाइयों पर पहुंचे।"

इस बीच, श्रीहरिकोटा स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस की सुविधा में कर्मचारियों ने इस लॉन्च को वर्षों की मेहनत का भावुक परिणाम बताया। एक कर्मचारी ने कहा, "यह मेरे लिए बेहद खुशी और गर्व का पल है। मेरा दिल बहुत तेजी से धड़क रहा है। आठ लंबे वर्षों से हमारे युवा इंजीनियर मिलकर लगातार काम कर रहे थे। यह कार्बन-कंपोजिट मोटर केसिंग है और काफी हल्की है।"

एक अन्य कर्मचारी ने कहा कि लॉन्च में हुई देरी के दौरान सभी की धड़कनें बढ़ी हुई थीं, लेकिन सफल प्रक्षेपण के बाद पूरी टीम बेहद खुश है। एक अन्य कर्मचारी ने कहा कि भारत के पहले निजी रॉकेट को कक्षा में पहुंचते देखना बेहद खुशी की बात है और मेहनत आखिरकार रंग लाई। स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंच गया। यह भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट की पहली उड़ान थी।

रॉकेट ने अपना अंतिम बर्न पूरा करने के बाद पेलोड को लगभग 450 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित किया। इसके साथ ही भारत निजी ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता रखने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया। 'मिशन आगमन (Mission Aagaman)' नामक यह मिशन सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से संचालित किया गया। 24 मीटर लंबे कार्बन-कंपोजिट रॉकेट ने स्टेज सेपरेशन और ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल (OAM) की फायरिंग समेत सभी निर्धारित उड़ान चरण सफलतापूर्वक पूरे किए।