अयोध्या: रामनगरी अयोध्या में श्रद्धा और भक्ति के प्रमुख पर्व सावन झूला मेले का शुभारंभ शनिवार से होगा। 15 से 28 अगस्त तक चलने वाले इस मेले के पहले दिन मणिपर्वत पर भगवान राम-सीता का झूला विहार आयोजित किया जाएगा। अयोध्याधाम के विभिन्न मंदिरों से 11 झांकियां शोभायात्रा के रूप में मणिपर्वत पहुंचेंगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिला प्रशासन और पुलिस ने मेले की तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर विशेष फोकस किया गया है।
छह जोन और 29 सेक्टर में बांटा गया मेला क्षेत्र:
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को छह जोन और 29 सेक्टर में विभाजित किया गया है। वहीं, मणिपर्वत क्षेत्र को एक जोन और पांच सेक्टर में बांटकर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुलिसकर्मियों की ड्यूटी दो पालियों में लगाई जाएगी।
मेला ड्यूटी कार्यालय सिंचाई डाक बंगला, नयाघाट अयोध्या में बनाया गया है। एसपी सिटी अयोध्या चक्रपाणि त्रिपाठी के मुताबिक, पुलिस बल की मांग के अनुरूप तैनाती की जा रही है। अपर पुलिस अधीक्षक से लेकर कांस्टेबल और महिला पुलिसकर्मियों तक पर्याप्त संख्या में बल लगाया गया है।
मेले में पीएसी, आरएएफ, एटीएस कमांडो और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात रहेंगी। ड्रोन कैमरों के जरिए भी पूरे क्षेत्र पर निगरानी रखी जाएगी। मणिपर्वत क्षेत्र पर विशेष निगरानी रहेगी।
आम श्रद्धालु भी भगवान को झूला झुला सकेंगे:
राम मंदिर के अनुष्ठान प्रभारी एवं महोत्सव के व्यवस्थापक आचार्य इंद्रदेव मिश्र ने बताया कि अयोध्या की परंपरा के अनुसार सावन शुक्ल तृतीया से झूला मेले का शुभारंभ होता है। सुरक्षा कारणों से इस बार भगवान झूला बिहारी को पहली बार कुबेर नवरत्न टीला पर ले जाकर झूलन विहार कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यहां पेड़ की डाल पर पहली बार झूला डाला गया है। झूला तैयार हो चुका है और आम श्रद्धालुओं को भी भगवान को झूला झुलाने का अवसर मिलेगा।
परंपरा के मुताबिक, अयोध्या के प्रमुख मंदिरों से भगवान की शोभायात्राएं निकलकर मणिपर्वत पहुंचती हैं। यहां धार्मिक आयोजन सांस्कृतिक उत्सव में बदल जाता है। लाखों श्रद्धालु युगल बिहारी सरकार के दर्शन कर इस आध्यात्मिक पर्व में शामिल होते हैं।
5 हजार से अधिक मंदिरों में दिखेगी झूला उत्सव की छटा:
अयोध्या में 5 हजार से अधिक छोटे-बड़े मंदिर हैं। सावन झूला उत्सव की विशेष छटा श्रीराम जन्मभूमि, कनक भवन, राजा दशरथ जी के महल, अशर्फी भवन, राम वल्लभा कुंज, दिव्या कला कुंज, विअहुति भवन, रंग महल, जानकी महल, राज सदन, रूप कला कुंज और मणिराम दास जी की छावनी समेत प्रमुख मंदिरों में देखने को मिलेगी।
सदियों पुरानी है सावन झूला मेले की परंपरा:
सावन झूला मेले की परंपरा अयोध्या में बेहद प्राचीन मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब रामलला चार महीने के हुए, तब सावन का महीना आया था। मां कौशल्या सहित तीनों माताओं ने चारों भाइयों को झूले पर झुलाया और उन्हें कजरी गीत सुनाए। तभी से सावन में झूला झुलाने की परंपरा चली आ रही है।
हर वर्ष सावन के महीने में अयोध्या के विभिन्न मठों और मंदिरों में यह पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। राम जन्मभूमि सहित रामनगरी के प्रमुख मंदिरों में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
यातायात और भीड़ नियंत्रण पर विशेष निगरानी:
मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया गया है। मणिपर्वत समेत पूरे अयोध्या क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। पर्व के प्रमुख दिन आवश्यकतानुसार यातायात डायवर्जन भी लागू किया जाएगा।
मेले में इस तरह तैनात रहेगा पुलिस बल:
सुरक्षा व्यवस्था के तहत 7 अपर पुलिस अधीक्षक, 30 पुलिस उपाधीक्षक, 60 निरीक्षक, 275 उपनिरीक्षक, 150 हेड कांस्टेबल और 800 कांस्टेबल तैनात किए गए हैं।
इसके अलावा 30 महिला उपनिरीक्षक, 25 महिला हेड कांस्टेबल और 80 महिला कांस्टेबल भी ड्यूटी पर रहेंगी। सुरक्षा व्यवस्था में पीएसी की 10 कंपनियां, आरएएफ की 2 कंपनियां, एटीएस कमांडो की 1 टीम और एसडीआरएफ की 2 टीमें लगाई गई हैं।
इसके साथ ही 30 हल्का वाहन चालक, 30 ड्रैगन लाइट और 2 ड्रोन कैमरे भी उपलब्ध रहेंगे।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा प्राथमिकता : एसएसपी:
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि श्रावण झूला मेला श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण पर्व है। सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत किया गया है। मणिपर्वत समेत पूरे मेला क्षेत्र को जोन और सेक्टर में बांटकर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन सिस्टम के माध्यम से लगातार निगरानी की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा दोनों पुलिस-प्रशासन की प्राथमिकता हैं। मेले के दौरान किसी तरह का व्यवधान न हो, इसके लिए सभी अधिकारी सतर्क रहेंगे।
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