लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में जापानी निवेश और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए आज लखनऊ में ‘यू.पी.-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026’ का मुख्य राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगा, जिसमें 200 से अधिक जापानी सीईओ, उद्योगपति, कारोबारी प्रतिनिधि और नीति-निर्माता हिस्सा ले रहे हैं। यह कार्यक्रम 18 से 23 अगस्त तक चल रहे जापानी प्रतिनिधिमंडल के दौरे का हिस्सा है।
जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी कर रहे हैं। इससे पहले नई दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया था। दोनों पक्षों ने भारत-जापान आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने तथा निवेश के नए अवसर तलाशने पर जोर दिया। इन्वेस्ट यूपी के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य जापानी कंपनियों को उत्तर प्रदेश के औद्योगिक ढांचे, निवेश नीतियों, बुनियादी सुविधाओं और कारोबारी संभावनाओं से परिचित कराना है।
लखनऊ में G2B और B2B बैठकें
लखनऊ में होने वाले मुख्य सम्मेलन में सरकार से कारोबार (G2B) और कारोबार से कारोबार (B2B) के बीच मैचमेकिंग सत्र होंगे। इन बैठकों में कंपनियों और सरकारी अधिकारियों के बीच सीधे संवाद के साथ संभावित निवेश परियोजनाओं और तकनीकी साझेदारी पर चर्चा होगी। सम्मेलन में मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी जा रही है।
यीडा में प्रस्तावित होगी ‘जापानी सिटी’
जापानी निवेश को एक जगह संगठित करने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में करीब 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित करने की योजना भी सामने रखी जा रही है। इसका उद्देश्य जापानी कंपनियों, उनके आपूर्तिकर्ताओं और सहायक उद्योगों के लिए एक ऐसा औद्योगिक क्लस्टर तैयार करना है, जहां उत्पादन, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को एक साथ बढ़ावा दिया जा सके।
3,191 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर भी नजर
निवेश सम्मेलन के दौरान एस्कॉर्ट्स कुबोटा और मिंडा कॉरपोरेशन की परियोजनाओं को भी प्रमुखता दी जा रही है। दोनों कंपनियों की तीन परियोजनाओं में कुल करीब 3,191 करोड़ रुपये के निवेश की बात सामने आई है। इनमें एस्कॉर्ट्स कुबोटा की करीब 2,025 करोड़ रुपये की परियोजना और मिंडा कॉरपोरेशन की करीब 1,166 करोड़ रुपये की दो परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं से कुल मिलाकर 10 हजार से अधिक रोजगार पैदा होने की संभावना जताई गई है।
लखनऊ के साथ कई शहरों में कार्यक्रम
यह निवेश पहल केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है। जापानी प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में नई दिल्ली, लखनऊ, ग्रेटर नोएडा, आगरा और वाराणसी को शामिल किया गया है। नई दिल्ली में उच्चस्तरीय सीईओ राउंडटेबल के बाद लखनऊ में मुख्य निवेश सम्मेलन हो रहा है। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के अलग-अलग औद्योगिक और पर्यटन क्षेत्रों की संभावनाओं को भी देख रहा है।
उत्तर प्रदेश के लिए क्यों अहम है यह सम्मेलन?
उत्तर प्रदेश सरकार जापान के साथ संबंधों को केवल निवेश तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि तकनीकी सहयोग, विनिर्माण, कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में लंबे समय की साझेदारी विकसित करने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी निवेशकों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं, जापानी प्रतिनिधिमंडल की ओर से भी उत्तर प्रदेश में निवेश, तकनीकी साझेदारी, विनिर्माण और रोजगार के अवसरों में रुचि व्यक्त की गई है।
इस सम्मेलन से अब नजर इस बात पर रहेगी कि बैठकों के बाद कितने निवेश प्रस्ताव ठोस परियोजनाओं में बदलते हैं और उत्तर प्रदेश में जापानी कंपनियों के निवेश से कितने नए रोजगार और तकनीकी अवसर पैदा होते हैं।
Add GTC Bharat on Google