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UN चीफ गुटेरेस का बड़ा बयान: अभी नहीं रुका युद्ध तो बढ़ेगा वैश्विक संकट...

By: GTC Bharat Desk  |  Edited By: Preeti Kamal  |  Updated at: March 26th 2026 06:12 PM

UN चीफ गुटेरेस का बड़ा बयान: अभी नहीं रुका युद्ध तो बढ़ेगा वैश्विक संकट...
UN चीफ गुटेरेस का बड़ा बयान: अभी नहीं रुका युद्ध तो बढ़ेगा वैश्विक संकट...

ब्रसेल्स, बेल्जियम: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (Antonio Guterres) ने मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्ष को लेकर वैश्विक समुदाय से तत्काल कूटनीतिक समाधान की अपील की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है और एक बड़े युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।

गुटेरेस ने कहा, “युद्ध शुरू होने के कुछ घंटों के भीतर ही मैंने चेतावनी दी थी कि यह संघर्ष एक ऐसी प्रतिक्रिया को जन्म दे सकता है, जिसे कोई नियंत्रित नहीं कर पाएगा। तीन हफ्तों बाद हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं और यह संघर्ष उन सीमाओं को पार कर चुका है, जिन्हें नेता भी अकल्पनीय मानते थे।”

वैश्विक अर्थव्यवस्था बिगड़ती जा रही है- गुटेरेस

महासचिव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह हिंसा न केवल भारी मानवीय पीड़ा का कारण बन रही है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी झकझोर रही है। दुनिया एक बड़े युद्ध, बढ़ती मानवीय पीड़ा और गहरे आर्थिक संकट की ओर बढ़ रही है। इस संकट से निपटने के लिए गुटेरेस ने जीन अर्नाल्ट (Jean Arnault) को अपना विशेष दूत नियुक्त किया है, जो संघर्ष के समाधान और मानवीय सहायता के प्रयासों का नेतृत्व करेंगे।

इसके साथ ही गुटेरेस ने सभी पक्षों से हिंसा रोकने और कूटनीति अपनाने की अपील की। अमेरिका और इज़राइल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि युद्ध को खत्म किया जाए—मानवीय संकट गहराता जा रहा है, नागरिक हताहत बढ़ रहे हैं और वैश्विक आर्थिक प्रभाव गंभीर होता जा रहा है। गुटेरेस ने ईरान से भी अपील की कि वह संघर्ष में शामिल नहीं होने वाले पड़ोसी देशों पर हमले बंद करे।

इस युद्ध का असर वैश्विक स्तर पर पड़ेगा- गुडेरस

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी कि इस युद्ध का असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक स्तर पर पड़ेगा, खासकर उन विकासशील देशों पर जो पहले से गरीबी और खाद्य संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज उर्वरक नहीं होगा तो कल भूख का संकट खड़ा हो सकता है।

अंत में उन्होंने कहा, “युद्ध समाधान नहीं है। हमें इस संकट से निकलने का रास्ता ढूंढना होगा। कूटनीति ही इसका रास्ता है, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान ही इसका रास्ता है, और शांति ही इसका समाधान है।”