NEET-UG पेपर लीक विवाद: NTA को बदलने या पुनर्गठित करने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका

By  GTC Bharat May 13th 2026 02:12 PM

नई दिल्ली: भारत की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा, NEET-UG 2026, इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। 3 मई 2026 को आयोजित हुई इस परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोपों के बाद मचे देशव्यापी हंगामे ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। देश भर के चिकित्सा संगठनों और छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस याचिका में न केवल राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं, बल्कि इसे पूरी तरह से भंग करने या इसमें बड़े पैमाने पर सुधार करने की मांग की गई है।

यह विवाद तब और गहरा गया जब जांच एजेंसियों ने पाया कि परीक्षा के "अनुमानित प्रश्न पत्र" (Guess Papers) सोशल मीडिया पर हफ्तों पहले से ही घूम रहे थे। 22 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य अब अधर में लटका हुआ है, जिससे पूरे देश के शैक्षणिक गलियारे में तनाव और अनिश्चितता का माहौल है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका: FAIMA की कड़ी मांगें

FAIMA द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) में केंद्र सरकार और NTA की कड़ी आलोचना की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पेपर लीक की यह घटना केवल एक "छिटपुट चूक" नहीं है, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की "प्रणालीगत विफलता" (Systemic Failure) है।

याचिका में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गई हैं:

  • NTA का पुनर्गठन या प्रतिस्थापन: NTA की जगह एक अधिक मजबूत, स्वायत्त और पारदर्शी परीक्षा निकाय की स्थापना की जाए।
  • न्यायिक निगरानी में परीक्षा: नीट-यूजी 2026 की आगामी पुन: परीक्षा (Re-exam) सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व वाली उच्च-स्तरीय समिति की प्रत्यक्ष निगरानी में कराई जाए।
  • नेशनल एग्जामिनेशन इंटीग्रिटी कमीशन (NEIC): भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक समर्पित 'राष्ट्रीय परीक्षा सत्यनिष्ठा आयोग' के गठन का प्रस्ताव दिया गया है।
  • तकनीकी सुरक्षा: प्रश्नपत्रों के लिए डिजिटल लॉकिंग सिस्टम और कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (CBT) को अपनाने पर जोर दिया गया है।
  • CBI स्टेटस रिपोर्ट: जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक हुई गिरफ्तारियों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

FAIMA के पदाधिकारियों का कहना है कि बार-बार होने वाली ऐसी अनियमितताएं प्रतिभाशाली छात्रों के मनोबल को तोड़ती हैं और देश की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती हैं।

जांच का दायरा: व्हाट्सएप 'गेस पेपर्स' और CBI की कार्रवाई

पेपर लीक के तार कई राज्यों से जुड़े होने की संभावना के चलते केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

  • व्हाट्सएप पर लीक: परीक्षा से लगभग 42 घंटे पहले व्हाट्सएप ग्रुप्स पर प्रश्न पत्र के हिस्से साझा किए गए थे।
  • केमिस्ट्री पेपर का मिलान: जांच में पाया गया कि वायरल हुए "गेस पेपर्स" के लगभग 120 प्रश्न वास्तविक केमिस्ट्री पेपर से हूबहू मेल खाते थे।
  • भारी लेनदेन: रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये पेपर परीक्षा से दो दिन पहले 5 लाख रुपये तक में बेचे जा रहे थे।
  • गिरफ्तारियां: राजस्थान, बिहार और हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से अब तक 13 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें कई कोचिंग संस्थानों के संचालक और एडमिशन सलाहकार शामिल हैं।

सीबीआई की विशेष टीमें अब उन मुख्य सरगनाओं की तलाश कर रही हैं जिन्होंने परीक्षा केंद्रों के साथ मिलीभगत कर पेपर को एक्सेस किया था। GTC Bharat की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले में 'सॉल्वर गैंग' की भूमिका भी संदिग्ध है।

22 लाख छात्रों पर प्रभाव: तनाव और विरोध प्रदर्शन

NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद ने छात्रों को मानसिक रूप से झकझोर कर रख दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के विभिन्न शहरों में छात्र और उनके अभिभावक सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

कड़ी मेहनत और लाखों रुपये कोचिंग पर खर्च करने वाले छात्रों के लिए परीक्षा का रद्द होना किसी सदमे से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अनिश्चितता के कारण छात्रों में मनोवैज्ञानिक तनाव और एंग्जायटी बढ़ रही है। कई छात्र संगठनों ने मांग की है कि जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिल जाती और सिस्टम पूरी तरह फूलप्रूफ नहीं हो जाता, तब तक नई परीक्षा की तारीखों की घोषणा न की जाए।


NTA के अस्तित्व पर संकट: क्या होगा अगला कदम?

NTA की साख इस समय सबसे निचले स्तर पर है। विपक्ष और शिक्षाविदों द्वारा NTA प्रमुख के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने राधाकृष्णन पैनल द्वारा प्रस्तावित सुधारों को लागू करने में देरी की, जिसका खामियाजा अब लाखों छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

राधाकृष्णन समिति ने परीक्षा केंद्रों के ऑडिट, डेटा सुरक्षा और पेपर लीक रोधी कानूनों को सख्त बनाने की सिफारिश की थी। सरकार पर अब दबाव है कि वह या तो NTA में आमूल-चूल परिवर्तन करे या FAIMA की मांग के अनुसार एक नया स्वतंत्र आयोग गठित करे।

पुन: परीक्षा की तैयारी और भविष्य की राह

ताजा जानकारी के अनुसार, सरकार ने जून 2026 की शुरुआत में NEET-UG पुन: परीक्षा आयोजित करने की योजना बनाई है। NTA ने स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों ने पहले पंजीकरण कराया था, उन्हें दोबारा आवेदन शुल्क नहीं देना होगा। हालांकि, छात्रों और विपक्षी दलों का कहना है कि केवल परीक्षा दोबारा कराना समाधान नहीं है; समाधान उस भ्रष्ट तंत्र को खत्म करने में है जो बार-बार पेपर लीक की घटनाओं को अंजाम देता है।

NEET-UG पेपर लीक विवाद केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत की शिक्षा व्यवस्था की शुद्धता का सवाल है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका अब लाखों छात्रों के लिए आशा की आखिरी किरण है। क्या कोर्ट NTA को भंग करने का आदेश देगा? क्या भारत को 'नेशनल एग्जामिनेशन इंटीग्रिटी कमीशन' जैसा नया सुरक्षा कवच मिलेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले हफ्तों में मिलेंगे। तब तक, 22 लाख छात्रों की निगाहें देश की सबसे बड़ी अदालत और सीबीआई की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।


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