नई दिल्ली: भारतीय रुपया सप्ताह की शुरुआत में भारी दबाव में रहा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.94 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट के साथ ही रुपया अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ गया, जो बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता को दर्शाता है। यह तेज गिरावट पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आई है, जहां जारी संघर्ष चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और फिलहाल शांति के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
इस स्थिति ने ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान की आशंका बढ़ा दी है, जिसका असर उभरते बाजारों की मुद्राओं, खासकर रुपये पर पड़ा है। एशियाई मुद्राओं में भी कमजोरी देखने को मिली, जो 0.1% से 0.8% तक गिरीं, क्योंकि संघर्ष कम होने की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं। बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम और डोनाल्ड ट्रंप व ईरान के बीच जारी बयानबाजी ने बाजारों में अनिश्चितता बनाए रखी है।
Rupee hits record low at 93.84 against US Dollar as US-Iran war boosts crude oil priceshttps://t.co/qWlxue0n6k
— Mint (@livemint) March 23, 2026
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रुपये की गिरावट का कारण
रुपये की गिरावट का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है, जो इस महीने 50% से अधिक बढ़ चुकी हैं। दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक होने के कारण भारत की मुद्रा ऊर्जा कीमतों के प्रति बेहद संवेदनशील है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि मौजूदा संकट पिछले तेल झटकों जितना गंभीर या उससे भी अधिक हो सकता है।
The International Energy Agency (IEA) is in talks with governments across Asia and Europe over the possible release of additional oil from strategic reserves “if necessary”, as the war on Iran continues to disrupt global energy markets, Executive Director Fatih Birol said.… pic.twitter.com/M0X0ZywMQH
— The Daily News (@DailyNewsJustIn) March 23, 2026
निफ्टी 50 अहम स्तरों से नीचे फिसल गया
घरेलू शेयर बाजारों में भी इसका असर साफ दिख रहा है। निफ्टी 50 अहम स्तरों से नीचे फिसल गया है, जबकि सेंसेक्स में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति को दर्शाता है। संघर्ष शुरू होने के बाद से रुपया करीब 3% कमजोर हो चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो इसमें और गिरावट आ सकती है। बैंक ऑफ अमेरिका के अनुमान के अनुसार, 2026 के मध्य तक रुपया 94 के स्तर को छू सकता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संकट किस दिशा में आगे बढ़ता है।
#Ag commodity markets have yet to fully price in the fallout from the Iran conflict, and a deepening nitrogen fertilizer crisis could trigger a new bull cycle in #grains if the war extends into the second half of 2026, according to Bank of America.https://t.co/ZcOqBk8GiB
— FarmPolicy (@FarmPolicy) March 21, 2026
₹1 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी पूंजी बाजार से निकल चुकी
इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी भी दबाव बढ़ा रही है। इस साल अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी पूंजी बाजार से निकल चुकी है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है और रुपये पर दबाव और बढ़ गया है। भू-राजनीतिक तनाव, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच रुपये की दिशा अब काफी हद तक वैश्विक ऊर्जा बाजार और जारी संघर्ष के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।