मुंबई: भारतीय शेयर बाजार ने अक्टूबर महीने की शुरुआत गिरावट के साथ की। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 287 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी भी दबाव में रहा।

बीएसई सेंसेक्स 72,192.89 पर खुला, जो पिछले बंद स्तर से 287.40 अंक यानी 0.40 प्रतिशत नीचे था। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने 22,543.70 पर शुरुआत की और 76.75 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने कुछ सुधार किया। रिपोर्ट दाखिल किए जाने के समय सेंसेक्स 123.13 अंक यानी 0.17 प्रतिशत नीचे 72,357.16 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 64.70 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,555.75 पर था।

निफ्टी के लिए 22,800 अहम स्तर

एचएसएल प्राइम रिसर्च के देवर्ष वकील ने कहा कि कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार के निचले स्तर पर खुलने की संभावना थी। इससे पहले निफ्टी लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ था। वकील के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,810 का स्तर तत्काल प्रतिरोध है, जबकि 23,000-23,100 का क्षेत्र अगला महत्वपूर्ण स्तर है। इस क्षेत्र के ऊपर निर्णायक बढ़त बाजार में सुधार के संकेत दे सकती है। वहीं, 22,569 के हालिया निचले स्तर से नीचे टिकाऊ गिरावट निफ्टी को 22,200 की ओर ले जा सकती है।

एक्सिस डायरेक्ट के वरिष्ठ शोध विश्लेषक हेमंग गोर ने भी निकट अवधि के लिए बाजार का रुख कमजोर बताया। उनके अनुसार 22,800 से नीचे कारोबार होने तक निफ्टी का रुख दबाव में रहेगा। उन्होंने 22,500 को तत्काल समर्थन स्तर बताया और इसके टूटने पर 22,400 तक गिरावट की संभावना जताई।

अमेरिकी बाजार से मिले-जुले संकेत

भारतीय बाजार की कमजोर शुरुआत से पहले अमेरिकी शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार हुआ। एसएंडपी 500 में 0.25 प्रतिशत और डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.86 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि नैस्डैक 0.24 प्रतिशत चढ़ा। एचएसएल प्राइम रिसर्च के अनुसार सितंबर में डॉव जोंस में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों में दूसरी तिमाही की जीडीपी वृद्धि को पहले के 1.5 प्रतिशत के अनुमान से बढ़ाकर 2.2 प्रतिशत वार्षिक दर किया गया। अगस्त में व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मुद्रास्फीति जुलाई के 3.7 प्रतिशत से घटकर 3.4 प्रतिशत रही। मुख्य पीसीई मुद्रास्फीति भी 3 प्रतिशत पर आ गई।

इसके बावजूद अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड करीब 5.29 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि 30-वर्षीय यील्ड 24 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई। ऊंची बॉन्ड यील्ड जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव डालने के साथ डॉलर को मजबूती दे रही है।

निवेशकों की नजर अमेरिकी आंकड़ों और फेड पर

बाजार की अगली दिशा के लिए निवेशकों की नजर अमेरिका के नए आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों पर रहेगी। आज जारी होने वाले बेरोजगारी दावों और आईएसएम विनिर्माण आंकड़ों के साथ फेड अधिकारियों बार्किन, कॉलिन्स और श्मिड के वक्तव्यों पर भी बाजार की नजर रहेगी। हेमंग गोर के मुताबिक कच्चे तेल या अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार नरमी आती है तो निफ्टी दोबारा 22,800 के ऊपर पहुंचकर 23,000 की ओर बढ़ सकता है।

इन शेयरों में दिखी तेजी और गिरावट

शुरुआती कारोबार में कोटक बैंक 2.49 प्रतिशत, इंफोसिस 2.29 प्रतिशत, टीसीएस 1.59 प्रतिशत, एचसीएलटेक 1.35 प्रतिशत और टेक महिंद्रा 1.11 प्रतिशत चढ़े। दूसरी ओर बजाज ऑटो में 3.44 प्रतिशत, मैक्स हेल्थकेयर में 2.08 प्रतिशत और महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी आईटी 1.62 प्रतिशत और निजी बैंक सूचकांक 0.74 प्रतिशत ऊपर रहा। ऑटो, मीडिया और रियल्टी सूचकांक क्रमशः 1.41 प्रतिशत, 0.94 प्रतिशत और 0.65 प्रतिशत नीचे रहे।

ब्रेंट कच्चा तेल 0.89 प्रतिशत गिरकर 97.16 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख रहा। जापान का निक्केई 1.8 प्रतिशत चढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग सपाट कारोबार कर रहा था। बाजार विश्लेषक विपिन डिक्सेना ने निवेशकों को केवल कम वैल्यूएशन के आधार पर बाजार में निचला स्तर बनने की धारणा से बचने की सलाह दी। उनके मुताबिक मौजूदा तकनीकी कमजोरी के बीच निवेशकों को शेयरों का चयन सावधानी से करना चाहिए।