नई दिल्ली: चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस बुधवार को एक और चरण में पहुंच गई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उपलब्ध कानूनी संरक्षण पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उन्हें ‘आजीवन इम्युनिटी’ क्यों दी गई है।

राहुल गांधी ने INDIA ब्लॉक की बैठक के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने सवाल किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को ऐसा कानूनी संरक्षण क्यों प्राप्त है और इसके बाद अपने राजनीतिक आरोप भी सामने रखे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस व्यवस्था का इस्तेमाल चुनावों में हेरफेर के लिए करते हैं। यह आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए राजनीतिक दावे हैं; इनके संबंध में चुनाव आयोग और बीजेपी का पक्ष अलग रहा है।

किस कानून की बात कर रहे हैं राहुल गांधी?

राहुल गांधी की आपत्ति 2023 में लागू हुए मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम के कानूनी प्रावधानों से जुड़ी है। इस कानून की धारा 16 में कहा गया है कि किसी मौजूदा या पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त अथवा निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए किसी कार्य, बात या अभिव्यक्ति को लेकर दीवानी या आपराधिक कार्यवाही शुरू या जारी नहीं की जा सकती।

इस प्रावधान को लेकर विपक्ष का तर्क है कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कानूनी सुरक्षा की सीमा पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं, इस कानून का प्रावधान आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े कार्यों के संदर्भ में कानूनी संरक्षण देता है।

चुनाव आयोग वर्तमान में ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में काम कर रहा है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।

SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कांग्रेस और कई विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है।

इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग के दो मौजूदा आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से SIR तथा मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर कथित तौर पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। इन रिपोर्टों को लेकर विपक्ष ने आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।

हालांकि, इन रिपोर्टों और विपक्षी आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं का बचाव किया है। बीजेपी नेताओं ने भी कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है और विपक्ष पर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को राजनीतिक विवाद में लाने का आरोप लगाया है।

INDIA ब्लॉक ने बनाया देशव्यापी आंदोलन का प्लान

SIR और चुनाव आयोग को लेकर विपक्षी दलों की रणनीति अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहने वाली है। 30 सितंबर को हुई INDIA ब्लॉक की बैठक के बाद गठबंधन ने देशव्यापी अभियान की घोषणा की।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के मुताबिक, 2 से 8 अक्टूबर के बीच जिला स्तर पर प्रदर्शन और ‘सेव डेमोक्रेसी’ अभियान चलाया जाएगा। विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की योजना बना रहे हैं।

गठबंधन के नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची और SIR से जुड़े मुद्दों को अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया है। INDIA ब्लॉक की ओर से चुनाव में बैलेट पेपर की वापसी सहित कई चुनावी सुधारों की मांग भी रखी गई है।

संसद से सड़क तक मुद्दा उठाने की तैयारी

विपक्षी दलों की योजना इस मुद्दे को संसद के साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाने की है। जिला स्तर के कार्यक्रमों के अलावा आने वाले महीनों में बड़ी रैलियां आयोजित करने की भी घोषणा की गई है।

दूसरी ओर, बीजेपी और उसके नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। बीजेपी की ओर से कहा गया है कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और विपक्ष को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में तथ्य सामने रखने चाहिए।

इस तरह CEC की कानूनी सुरक्षा, SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं। 6 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च और 2 से 8 अक्टूबर के बीच होने वाले कार्यक्रमों के दौरान विपक्ष की आगे की रणनीति भी सामने आएगी।