नई दिल्ली, भारत: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सूचना प्रौद्योगिकी (ब्लॉकिंग नियम) के तहत गठित समीक्षा समिति को निर्देश दिया कि वह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा पार्टी के X अकाउंट को ब्लॉक किए जाने के खिलाफ दायर चुनौती की जांच करे और अपना फैसला रिकॉर्ड पर पेश करे।

न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने अभिजीत दिपके की याचिका पर केंद्र सरकार और X को नोटिस भी जारी किया। याचिका में राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर किए गए अकाउंट ब्लॉक करने के फैसले को चुनौती दी गई है। अदालत ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

तत्काल राहत की मांग पर सुनवाई टली 

हालांकि, अदालत ने फिलहाल ब्लॉक किए गए अकाउंट को बहाल करने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया और तत्काल राहत की मांग पर सुनवाई टाल दी। दिपके की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने अदालत से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक अकाउंट बहाल करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को ब्लॉकिंग आदेश रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया जाए।

प्रभावित पक्ष को सुनवाई का मौका मिलना चाहिए- अखिल सिब्बल

अखिल सिब्बल ने तर्क दिया कि किसी भी प्रभावित पक्ष को सुनवाई का मौका दिए बिना ऐसा आदेश पारित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे मामलों में अदालतों ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए कुछ विवादित पोस्ट को ब्लॉक रहने दिया, लेकिन अकाउंट बहाल कर दिया था।

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने इन दलीलों का विरोध किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस मामले में ऐसे मुद्दे उठाए गए हैं, जिन पर सरकार का पक्ष सामने आने के बाद विस्तृत विचार की आवश्यकता होगी। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों से जुड़ा कानूनी ढांचा अभी विकसित हो रहा है और इसके व्यापक प्रभावों को देखते हुए गंभीरता से विचार जरूरी है।

ब्लॉकिंग आदेश की जांच पर अदालत ने जताया संकोच 

अदालत ने फिलहाल ब्लॉकिंग आदेश की जांच को लेकर भी संकोच जताया। कोर्ट ने कहा कि न तो याचिकाकर्ता और न ही अदालत ने अभी तक ब्लॉकिंग आदेश देखा है। जरूरत पड़ने पर बाद में रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया जा सकता है। पीठ ने यह भी कहा कि पिछले मामलों में अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उपयोगकर्ताओं को ब्लॉकिंग आदेश देने का निर्देश नहीं दिया था। हालांकि यदि कोई प्लेटफॉर्म स्वेच्छा से ऐसा करता है तो वह अलग बात होगी।

कुछ पोस्ट ही नहीं बल्कि पूरे अकाउंट को लेकर है चिंता

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यह मामला पहले के कुछ मामलों से अलग प्रतीत होता है, क्योंकि यहां केवल कुछ पोस्ट नहीं बल्कि पूरे अकाउंट की गतिविधियों को लेकर चिंताएं जताई गई हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना तक पहुंच रोकने की प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि इसमें समीक्षा का प्रावधान मौजूद है। इसी आधार पर कोर्ट ने समीक्षा समिति को सभी मुद्दों की जांच कर फैसला रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।

अभिजीत दिपके ने कार्यवाही में शामिल होने की मांगी अनुमति

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने X के रवैये पर भी सवाल उठाए और कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म याचिकाकर्ता की मदद करता दिखाई दे रहा है।

वहीं, अखिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि अभिजीत दिपके फिलहाल भारत से बाहर हैं और उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तथा अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए समीक्षा समिति की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति मांगी। अदालत ने कहा कि यह मांग समीक्षा समिति के समक्ष रखी जा सकती है और समिति कानून के अनुसार निर्णय लेगी।