नई दिल्ली, भारत: दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने एआई-जनित डीपफेक, मॉर्फ्ड तस्वीरों और सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित रूप से छेड़छाड़ किए गए कंटेंट के जरिए उनके व्यक्तित्व अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया कोर्ट के सामने रखा गया कंटेंट व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन से ज्यादा एक राजनीतिक फैसले की आलोचना प्रतीत होता है।
नेताओं को व्यंग्य, कार्टून का सामना करना पड़ता है- पीठ
पीठ ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को लंबे समय से व्यंग्य, कार्टून और आलोचना का सामना करना पड़ता रहा है। न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा, “आजादी के समय से हम आरके लक्ष्मण के कार्टून देखते आए हैं। उस समय शायद सोशल मीडिया इतना व्यापक नहीं था, जितना आज है।”
Criticism of Raghav Chadha's political decisions cannot be termed as violation of personality rights: Delhi High Court Read here: https://t.co/sP3k5ozleN pic.twitter.com/kWxkRsmGPS
— Bar and Bench (@barandbench) May 21, 2026
सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट केवल राजनीतिक आलोचना नहीं
राघव चड्ढा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने दलील दी कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कई पोस्ट केवल राजनीतिक आलोचना नहीं, बल्कि मानहानिकारक और अभद्र हमले हैं, जिनमें सांसद को पैसे के लिए राजनीतिक पक्ष बदलने वाला बताया गया है।
उन्होंने कहा, “उन्हें साड़ी में दिखाया गया है। प्रधानमंत्री को पैसे बांटते हुए दिखाया जा रहा है,” और अदालत को कुछ पोस्ट व तस्वीरों का हवाला दिया। हालांकि अदालत ने बार-बार सवाल उठाया कि क्या किसी राजनीतिक नेता के सार्वजनिक आचरण या राजनीतिक फैसलों पर की गई आलोचना को व्यक्तित्व अधिकारों के तहत रोका जा सकता है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रसाद ने दिया संकेत
राजीव नायर ने कहा कि यह मामला मानहानि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने से भी जुड़ा है। उन्होंने दलील दी, “वे कह रहे हैं कि मैं पैसे के लिए गया हूं। इसे निष्पक्ष आलोचना नहीं कहा जा सकता।”
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रसाद ने संकेत दिया कि अदालत इस मामले में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त कर सकती है, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सोशल मीडिया के दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा के बीच संतुलन जैसे व्यापक कानूनी मुद्दों पर सहायता मिल सके।
मानहानि और आलोचना के बीच की रेखा बहुत पतली है
पीठ ने कहा, “मानहानि और आलोचना के बीच की रेखा बहुत पतली है। एक ओर गरिमा के साथ जीने का अधिकार प्रभावित होता है, वहीं दूसरी ओर अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार भी छीना नहीं जा सकता।”
मेटा की ओर से पेश वकील ने कहा कि राघव चड्ढा द्वारा प्रस्तुत कई स्क्रीनशॉट केवल समाचार रिपोर्ट या सामान्य सामग्री हैं। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अंतरिम राहत संबंधी आवेदन पर आदेश सुरक्षित रख लिया।
राघव चड्ढा ने अपनी याचिका में अदालत से की मांग
राघव चड्ढा ने अपनी याचिका में अदालत से एआई तकनीक और डिजिटल रूप से बदले गए कंटेंट के जरिए उनकी तस्वीर, आवाज, पहचान और व्यक्तित्व के कथित दुरुपयोग को रोकने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एआई-जनित डीपफेक, मॉर्फ्ड वीडियो, सिंथेटिक वॉयस क्लोन, फर्जी भाषण और अन्य भ्रामक सामग्री के निर्माण व प्रसार पर रोक लगाने की मांग की है।
एआई टूल्स के जरिए प्रतिष्ठा को पहुंच सकता है नुकसान
याचिका में कहा गया है कि एआई टूल्स के जरिए उनकी पहचान का अनधिकृत इस्तेमाल जनता को गुमराह कर सकता है और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है। राघव चड्ढा 2020 से 2022 तक दिल्ली की राजेंद्र नगर विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। कई वर्षों तक आम आदमी पार्टी से जुड़े रहने के बाद उन्होंने अप्रैल 2026 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था।
इससे पहलेअमिल कपूर, अमिताभ बच्चन को मिली थी राहत
यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों से जुड़े बढ़ते मामलों की श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले अनिल कपूर और अमिताभ बच्चन जैसे सार्वजनिक हस्तियों को भी एआई-जनित सामग्री में उनकी आवाज और पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत से राहत मिल चुकी है।
Add GTC Bharat on Google