नई दिल्ली, भारत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली दौरे के दौरान संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के महानिदेशक को भारत की समृद्ध कृषि विरासत से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए।
प्रधानमंत्री ने भारत के बेहतरीन अनाजों का संग्रह भेंट किया, जिसमें केरल का रेड राइस, पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग चावल, इंडो-गंगेटिक मैदानी क्षेत्र का बासमती चावल, असम का जोहा चावल, उत्तर प्रदेश का कालानमक चावल और महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से तैयार मिलेट बार शामिल थे।
केरल का 'रेड राइस' अपने पौष्टिक गुणों के लिए प्रसिद्ध है
केरल के पलक्कड़ की काली मिट्टी में उगाया जाने वाला रेड राइस, जिसे “मट्टा” या “पलक्कड़न मट्टा” कहा जाता है, अपने लाल-भूरे रंग और पौष्टिक गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यह फाइबर, मैग्नीशियम और विटामिन B6 से भरपूर होता है और इसे GI टैग भी प्राप्त है।
पश्चिम बंगाल का 'गोविंदभोग चावल' अपनी सुगंध के लिए प्रसिद्ध है
पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग चावल अपनी सुगंध और छोटे दानों के लिए प्रसिद्ध है। इसका मीठा और मक्खन जैसा स्वाद इसे खिचड़ी और पायेश जैसे पारंपरिक व्यंजनों के लिए खास बनाता है। इंडो-गंगेटिक क्षेत्र का बासमती चावल “सुगंध की रानी” के नाम से जाना जाता है। इसके लंबे और पतले दाने पकने पर लगभग दोगुने हो जाते हैं। यह ग्लूटेन-फ्री और मध्यम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला चावल माना जाता है।

असम का जोहा चावल अपनी मीठी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है
असम की ब्रह्मपुत्र घाटी का जोहा चावल अपनी मीठी खुशबू और छोटे दानों के लिए प्रसिद्ध है। यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है और इसका स्वाद हल्का मक्खन जैसा होता है। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर क्षेत्र का कालानमक चावल “बुद्धा राइस” के नाम से प्रसिद्ध है। इसकी काली भूसी और सुगंध इसे खास बनाती है। यह आयरन, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है।
महाराष्ट्र का ज्वार-बाजरा कृषि परंपरा का अहम हिस्सा हैं
महाराष्ट्र के सोलापुर, अहमदनगर और मराठवाड़ा क्षेत्रों में उगाए जाने वाले ज्वार और बाजरा जैसे मिलेट्स राज्य की कृषि परंपरा का अहम हिस्सा हैं। इन्हीं से तैयार मिलेट बार स्वास्थ्य और आधुनिक जीवनशैली का बेहतरीन मिश्रण माने जाते हैं।

इटली में प्रधानमंत्री मोदी 'एग्रीकोला मेडल' से सम्मानित
इटली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को बुधवार को रोम स्थित FAO मुख्यालय में वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित “एग्रीकोला मेडल” भी प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री ने इस सम्मान को भारतीय किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान भारत की खाद्य सुरक्षा, मानव कल्याण और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में कृषि केवल अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि धरती मां और लोगों के बीच एक पवित्र संबंध है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली FAO मुख्यालय यात्रा रही।
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