पाजू, दक्षिण कोरिया: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ पर इमजिंगक पीस पार्क में आयोजित स्मृति समारोह में भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। रक्षा मंत्री ने उन बहादुर सैनिकों को याद किया, जिन्होंने क्षेत्र में शांति के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।

राजनाथ सिंह ने कहा, “यह स्मारक साहस, करुणा और बलिदान का प्रतीक है। यह भारत और कोरिया के बीच सदियों पुरी दोस्ती का संदेश भी देता है। सात दशक पहले जब कोरियाई प्रायद्वीप युद्ध की त्रासदी में घिरा था, तब भारत ने मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। शांति और सेवा की भावना से प्रेरित होकर भारत ने अपनी 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस यूनिट के जरिए युद्ध में योगदान दिया।”

रक्षा मंत्री का स्वागत क्वोन ओह-यूल ने किया

समारोह स्थल पर रक्षा मंत्री का स्वागत क्वोन ओह-यूल ने किया। इस दौरान कोरियाई युद्ध में भारतीय सैनिकों के योगदान को दर्शाने वाली फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम के दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में एमओयू हस्ताक्षर समारोह और स्मारक संकेतक का अनावरण किया गया। भारत और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रगान भी सैन्य बैंड द्वारा प्रस्तुत किए गए।

दो मिनट का मौन रखा गया और 'लास्ट पोस्ट' बजाई गई

शहीद सैनिकों के सम्मान में स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई, दो मिनट का मौन रखा गया और “लास्ट पोस्ट” बजाई गई। समारोह को संबोधित करते हुए क्वोन ओह-यूल ने कोरियाई युद्ध में भारतीय सैनिकों के योगदान की सराहना की और दोनों देशों की साझा विरासत को संरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया।

इस दौरान मई 2026 के “कोरियन वॉर हीरो सर्टिफिकेट” से कर्नल एजी रंगराज की भतीजी कल्पना प्रसाद को सम्मानित किया गया। कर्नल रंगराज को युद्ध में उनकी विशिष्ट सेवा के लिए यह सम्मान दिया गया। इससे पहले 20 मई को राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के बीच सियोल में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता हुई थी।

दोनों देशों के नेताओं ने रक्षा सहयोग के दायरे की समीक्षा की

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की और रक्षा उद्योग, उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकी, सैन्य आदान-प्रदान, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

दोनों पक्षों ने भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” और दक्षिण कोरिया की क्षेत्रीय रणनीतिक दृष्टि के बीच बढ़ती समानता को स्वीकार किया और स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

कई अहम क्षेत्रों के समझौता ज्ञापनों पर हुए हस्ताक्षर

रक्षा सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें रक्षा साइबर सहयोग, भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज और कोरिया नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के बीच प्रशिक्षण तथा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सहयोग शामिल है।

राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन मंत्री ली योंग-चुल से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त निर्यात के नए अवसर तलाशने पर सहमति जताई। इसके अलावा भारत-कोरिया डिफेंस इनोवेशन एक्सेलेरेटर इकोसिस्टम (KIND-X) के जरिए दोनों देशों के इनोवेशन इकोसिस्टम को जोड़ने की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई।

'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला

बाद में राजनाथ सिंह ने भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा उद्योग बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता की, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए।

रक्षा मंत्री ने भारत के बढ़ते रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम और “आत्मनिर्भर भारत” पहल के तहत उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कोरियाई रक्षा कंपनियों से भारतीय उद्योग के साथ साझेदारी मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने भारतीय और कोरियाई कंपनियों की साझेदारी को आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए अहम बताया।