नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्र आवास की पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई होगी। याचिका में प्रत्येक मृत छात्र के परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजा, दिल्लीभर के पीजी और छात्रावासों का सुरक्षा ऑडिट तथा हादसे की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के कानून के छात्र अनिकेत कुमार गुप्ता ने अधिवक्ता उमेश कुमार के माध्यम से यह याचिका दायर की है। इसमें दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में छात्रों के जीवन और सुरक्षा को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार बताते हुए हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की गई है।

मालिक से लेकर ठेकेदार तक की भूमिका की जांच की मांग

याचिका में भवन गिरने की निष्पक्ष और व्यापक आपराधिक जांच कराने की मांग की गई है। इसमें भवन मालिक, ठेकेदार, बिल्डर, वास्तुकार, संरचनात्मक इंजीनियर और मरम्मत या निर्माण कार्य से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग शामिल है। याचिकाकर्ता ने एक स्वतंत्र समिति गठित करने की भी मांग की है, जो यह पता लगाए कि इमारत स्वीकृत नक्शे और संरचनात्मक सुरक्षा मानकों के अनुरूप थी या नहीं।

इसके अलावा यह जांच भी प्रस्तावित है कि क्या भवन में अनधिकृत निर्माण, अतिरिक्त मंजिल, खुदाई या भार वहन करने वाली संरचनाओं में बदलाव किया गया था और क्या हादसे से ठीक पहले चल रहा मरम्मत या नवीनीकरण कार्य इसके लिए जिम्मेदार था। हालिया रिपोर्टों में भी बेसमेंट में चल रहे काम और कथित निर्माण संबंधी अनियमितताओं पर सवाल उठे हैं।

दिल्ली के सभी छात्र आवासों का सुरक्षा ऑडिट

PIL में पहले सत्य निकेतन के सभी पीजी, हॉस्टल और छात्र आवासों का तत्काल संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसके बाद दिल्ली के अन्य प्रमुख छात्र क्षेत्रों में भी ऐसी जांच कराने का प्रस्ताव है। इन क्षेत्रों में विजय नगर, कमला नगर, मुखर्जी नगर, गांधी विहार, नेहरू विहार, हडसन लेन, गुरमंडी, करोल बाग, ओल्ड राजेंद्र नगर और लक्ष्मी नगर शामिल हैं। याचिका में मांग की गई है कि जिन इमारतों से मानव जीवन को तत्काल खतरा है, उन्हें खाली कराया जाए या उनके इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए। साथ ही प्रभावित छात्रों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक आवास की व्यवस्था भी की जाए।

निरीक्षण की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग

याचिका में दिल्ली सरकार से पीजी और हॉस्टल की जांच से जुड़ा एक सार्वजनिक डेटाबेस तैयार करने की मांग भी की गई है। इसमें किसी आवास की निरीक्षण स्थिति, संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणपत्र और भवन के स्वीकृत उपयोग की जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही गई है, ताकि छात्र और उनके अभिभावक आवास लेने से पहले उसकी सुरक्षा स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकें। याचिका में प्रत्येक मृत छात्र के परिजन को ₹1 करोड़ का मुआवजा देने की मांग की गई है। इसके अलावा हादसे में घायल लोगों के लिए उचित मुआवजे और दिव्यांगता झेलने वाले छात्रों के लिए नौकरी की सुरक्षा जैसे राहत उपायों की भी मांग की गई है।

सबूत सुरक्षित रखने की मांग

याचिकाकर्ता ने हादसे से जुड़े महत्वपूर्ण भौतिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की है। इनमें मलबा, स्वीकृत भवन नक्शे, नगर निगम रिकॉर्ड, संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणपत्र, निरीक्षण रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और मरम्मत या निर्माण कार्य से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। याचिका में वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच के जरिए इमारत गिरने का वास्तविक कारण निर्धारित करने पर भी जोर दिया गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना से जुड़ी एक PIL को तुरंत सुनवाई के लिए लिस्ट करने की मंज़ूरी दे दी। इस घटना में छह लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।

आपातकालीन बचाव व्यवस्था मजबूत करने की मांग

PIL में घनी आबादी वाले छात्र आवास क्षेत्रों के लिए समयबद्ध आपातकालीन प्रतिक्रिया और बचाव प्रोटोकॉल बनाने की मांग की गई है। इसके तहत भवन हादसे की स्थिति में दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, एंबुलेंस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और अन्य आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

सत्य निकेतन हादसे में हुई कई लोगों की मौत

सत्य निकेतन में पांच मंजिला छात्र पीजी की इमारत रविवार को ढह गई थी। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और कई लोग घायल हुए हैं। बचाव एजेंसियों ने मलबे से लोगों को सुरक्षित निकाला। घटना के बाद दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और भवन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एमसीडी ने भी क्षेत्र में अवैध बहुमंजिला निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में छात्र पीजी की सुरक्षा को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच यह PIL अब पूरे दिल्ली में छात्र आवासों की संरचनात्मक सुरक्षा की व्यापक जांच की मांग कर रही है।