नई दिल्ली: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों को संवेदनशील जानकारी साझा करने के आरोपों का सामना कर रही ट्रैवल व्लॉगर और यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एस.सी. शर्मा की पीठ ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप "बेहद गंभीर" हैं और उनके बचाव से जुड़े तर्कों पर विचार ट्रायल के दौरान किया जाएगा। ज्योति मल्होत्रा की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उन्हें 16 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया था और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, फिर भी वे एक वर्ष से अधिक समय से हिरासत में हैं। इस पर अदालत ने कहा कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है और ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

 ज्योति मल्होत्रा पड़ोसी देश की यात्रा पर गई थीं

पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपों के अनुसार ज्योति मल्होत्रा पड़ोसी देश की यात्रा पर गई थीं और भारत सरकार द्वारा देश छोड़ने का आदेश दिए गए एक व्यक्ति के संपर्क में लगातार बनी हुई थीं। ज्योति मल्होत्रा ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें 7 मार्च को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

'ट्रैवल विद जो' नामक यूट्यूब चैनल चलाती थीं ज्योति मल्होत्रा

हरियाणा के हिसार निवासी ज्योति मल्होत्रा 'ट्रैवल विद जो' नामक यूट्यूब चैनल चलाती थीं। उन पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा की। हरियाणा पुलिस ने दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात एक अधिकारी के साथ उनके कथित संपर्कों के सबूत मिलने के बाद उनके खिलाफ देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी।

जांच एजेंसियों का दावा है कि इसके बाद वह पाकिस्तान गई थीं, जहां उनकी मुलाकात वहां की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से जुड़े कुछ लोगों से हुई। पूछताछ के दौरान उन्होंने उन व्यक्तियों की पहचान भी बताई थी।