मुंबई, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी माध्यमों और सभी शिक्षा बोर्डों के तहत आने वाले स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य विषय बनाने का नोटिफिकेशन जारी किया है। नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे (Dadaji Bhuse) ने विधानसभा में यह जानकारी दी। वह विधायक हारून खान द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
मंत्री भुसे ने बताया कि 1 मार्च 2020 को जारी सरकारी अधिसूचना के अनुसार राज्य के सभी माध्यमों और सभी प्रबंधन के स्कूलों में मराठी को अनिवार्य विषय बनाया गया है। कुछ अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय शिक्षा बोर्डों में मराठी को दूसरी भाषा या तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में मराठी को पाठ्यक्रम से हटाया नहीं जा सकता।
#Maharashtra | Government has issued a strict warning to schools, including those affiliated with national and international boards, where Marathi is not taught.https://t.co/KzduDUhrnA
— Deccan Chronicle (@DeccanChronicle) March 13, 2026
मराठी न पढ़ाए जाने पर होगी स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई
विधायक हारून खान द्वारा एक विशेष स्कूल को लेकर की गई शिकायत पर मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग उस संस्थान का तुरंत निरीक्षण करेगा। यदि वहां मराठी नहीं पढ़ाई जा रही है तो स्कूल को कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्कूलों में मराठी पढ़ाने का नियम केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निजी, गैर-अनुदानित और विदेशी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों पर भी लागू होता है। चूंकि मराठी राज्य की आधिकारिक भाषा है, इसलिए नई पीढ़ी का इसे सीखना और इसके संरक्षण में योगदान देना जरूरी है।
Marathi Language Made Mandatory in Maharashtra Schools: Education Minister Bhuse. Maharashtra's Education Minister Dadaji Bhuse announced a new mandate requiringall schools to teach Marathi as a compulsory subject. This initiative aims topreserve... https://t.co/3ztBSbfaxj pic.twitter.com/juCvmQK4a8
— NationPress (@np_nationpress) March 13, 2026
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो स्कूल मराठी नहीं पढ़ा रहे हैं उन्हें नियम लागू करने के निर्देश दिए जाएंगे और आदेश का पालन नहीं करने वाले संस्थानों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है। इस मुद्दे पर विधानसभा में विधायक अतुल भातखालकर और अमित देशमुख ने भी चर्चा में भाग लिया।